चिंताजनक: हर साल पिघल रही 1,390 करोड़ टन बर्फ, जल सुरक्षा पर संकट,; तेजी से खाली होते चले जा रहे एशिया के हिम जल भंडार

Spread the love

शिया की जीवनरेखा हिमालय, तिब्बती पठार और आसपास की पर्वत शृंखलाओं में मौजूद ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों के ताजा अध्ययन के अनुसार हाई माउंटेन एशिया क्षेत्र से हर साल औसतन 1,390 करोड़ टन बर्फ खत्म हो रही है, जिसके चलते पिछले दो दशकों में करीब 27,800 करोड़ टन बर्फ गायब हो चुकी है।

यह बदलाव केवल पहाड़ों पर जमी बर्फ के घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा, कृषि, जलविद्युत, बुनियादी ढांचे और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संकट आने वाले वर्षों में और भी भयावह रूप ले सकता है।

हिम जल भंडार कहलाता है हाई माउंटेन एशिया
हाई माउंटेन एशिया को अक्सर एशिया के हिम जल भंडार कहा जाता है, क्योंकि यही ग्लेशियर सालभर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेकोंग, येलो और यांग्त्जे जैसी बड़ी नदियों को जल उपलब्ध कराते हैं। इन नदियों पर करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि निर्भर करता है। लेकिन अब इनके तेजी से पिघलने से एक ओर बाढ़ और ग्लेशियल झील फटने जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में गंभीर जल संकट की आशंका गहरा रही है।

नासा के ग्रेस मिशन के दौरान उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों और जलवायु संबंधी डाटा के विश्लेषण के साथ वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग तकनीकों का भी उपयोग किया, जिसके अनुसार 2002 से 2023 के बीच हर साल औसतन 13.9 गीगाटन यानी करीब 1,390 करोड़ टन बर्फ खत्म हो रही है। यदि पूरे 20 वर्षों का हिसाब लगाया जाए, तो यह आंकड़ा 27,800 करोड़ टन से अधिक हो जाता है।

बढ़ते तापमान के साथ और भयावह हो सकते हैं हालात
वैज्ञानिकों के अनुसार यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ता रहा और दुनिया एसएसपी 585 परिदृश्य की ओर बढ़ी तो ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार हर साल 19.5 गीगाटन यानी 1,950 करोड़ टन तक पहुंच सकती है। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुए हैं।

और पढ़े  हरिद्वार: गंगा की तेज धारा में फंसा कांवड़ियां, जल पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने निकाला सकुशल

95 हजार ग्लेशियरों पर टिकी करोड़ों जिंदगी
रिपोर्ट के अनुसार हाई माउंटेन एशिया दुनिया के सबसे जटिल भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में से एक है। यह करीब 50 लाख वर्ग किमी में फैला है, जिसमें भारत, चीन, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। इस क्षेत्र में हिमालय, काराकोरम, हिंदू कुश, पामीर और तियान शान जैसी प्रमुख पर्वत शृंखलाएं मौजूद हैं। अध्ययन के अनुसार यहां 95,000 से अधिक ग्लेशियर हैं, जो लगभग एक लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। ये ग्लेशियर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेकोंग, येलो और यांग्त्जे जैसी नदियों को पोषण देते हैं, जिन पर करोड़ों लोगों का जीवन निर्भर है।


Spread the love
  • Related Posts

    Weather: देश के कई हिस्सों में आज भारी बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    Spread the love

    Spread the loveशनिवार को भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, पूर्वोत्तर, पश्चिमी और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में…


    Spread the love

    अब मिलेगा गरिमा के साथ मौत का भी अधिकार, 2 मेडिकल बोर्ड तय करेंगे तो हटेगा लाइफ सपोर्ट

    Spread the love

    Spread the loveहरियाणा में अब जीवन के अंतिम चरण में इलाज से जुड़े फैसलों के लिए नई कानूनी व्यवस्था लागू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद…


    Spread the love