आईआईटी बॉम्बे में बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र की मौत का मामला इस वक्त सुर्खियों में है। आईआईटी प्रशासन सवालों में है। छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। छात्र प्रशासन से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इस बीच परिवार की शिकायत पर एक प्रोफेसर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, मामला मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को सौंपा गया और संस्थान ने अपने शुरुआती बयान पर बाद में माफी भी मांगी।
क्या है पूरा मामला?
18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे (20) की मौत हो गई। संस्थान ने 19 सितंबर को जारी अपने शुरुआती बयान में कहा था कि उसी दिन एक परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था।
नकल वाली बात पर परिवार ने क्या कहा?
साहिल के माता-पिता का कहना है कि उनके बेटे ने कभी पढ़ाई के दबाव को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी। उनके मुताबिक, साहिल के पहले साल में कोई बैकलॉग भी नहीं था और वह संस्थान में पढ़ाई के साथ-साथ बैडमिंटन और स्केटिंग जैसी गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था।
साहिल की मां ने बताया कि उनका बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी करना चाहता था। परिवार को ऐसा कभी नहीं लगा कि साहिल पढ़ाई को लेकर किसी परेशानी या दबाव में था। उनकी मां के मुताबिक, साहिल ने परिवार के सामने ऐसी कोई चिंता भी जाहिर नहीं की थी।
साहिल के पिता ने कहा, “यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह नकल करने की कोशिश कर रहा था। वह हमेशा से पढ़ाई में बहुत अच्छा रहा।”
अब मामले की जांच कौन कर रहा है?
मुंबई पुलिस ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी है। अपराध शाखा छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों, परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोपों और संस्थान में हुए घटनाक्रम की जांच कर रही है। मामले में प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला और अन्य लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
प्रोफेसर को लेकर आईआईटी ने क्या कहा?
मामले के बीच शुरुआत में आईआईटी बॉम्बे के शिक्षक मंच ने प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला के समर्थन में बयान जारी किया था। संस्थान ने कहा कि प्रोफेसर ने संस्थान की सीनेट द्वारा स्वीकृत शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई थी।
संस्थान के मुताबिक, 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मध्य-सत्र परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान प्रोफेसर डूला ने एक छात्र को बिना अनुमति मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए देखा। संस्थान ने इसे शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया और कहा कि प्रोफेसर ने संस्थान की तय प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी अधिकारियों को दी।
छात्रों ने प्रशासन के सामने क्या मांगें रखीं?
छात्रों ने संस्थान को 18 सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें घटना की स्वतंत्र जांच, प्रशासन की जवाबदेही, छात्र कल्याण और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में सुधार समेत कई मांगें शामिल हैं। जैसे-
- जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई
- बदनाम करने को लेकर सार्वजनिक माफी: छात्रों ने छात्र के बारे में लिंक्डइन पर की गई पोस्ट में आंशिक और स्पष्ट जानकारी साझा किए जाने को उसकी “बदनामी” बताया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
- अधिकारियों के साथ ओपन हाउस: छात्रों ने निदेशक, डीन एसए, डीन एपी और मृत छात्र के विभागाध्यक्ष के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की है। इसमें छात्र सीधे अपने सवाल और चिंताएं रख सकेंगे। छात्रों ने यह बैठक 22 सितंबर से पहले कराने की मांग की है।
- मांगों के क्रियान्वयन की जवाबदेही: छात्रों ने मांगों की प्रगति पर हर सप्ताह अपडेट देने की भी मांग की है।
- स्वतंत्र जांच समिति: छात्रों ने प्रोफेसरों, छात्र प्रतिनिधियों, बाहरी सदस्यों और छात्र प्रतिनिधियों की ओर से सुझाए गए सदस्यों वाली स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है।
- अंतरिम और अंतिम रिपोर्ट: छात्रों ने 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट जारी करने की मांग की है।
- आर्थिक सहायता: छात्रों ने हाल के महीनों में आईआईटी बॉम्बे में अपने प्रियजनों को खोने वाले चार लोगों के परिवारों को उचित और जल्द वित्तीय सहायता देने की मांग की है।
प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर क्या कहा?
रविवार को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ लंबी बैठक की। इसके बाद उन्होंने छात्रों की ओर से सौंपे गए 18 से अधिक मांगों वाले मांगपत्र को स्वीकार किया और उस पर हस्ताक्षर किए। सोमवार को संस्थान के संचालक मंडल की विशेष बैठक बुलाई गई। इसमें छात्रों की मांगों और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।
इसके बाद निदेशक शिरीष केदारे की छात्रों के साथ खुली बैठक भी प्रस्तावित थी। यह बैठक रविवार को छात्रों के साथ हुई बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए रखी गई थी। सोमवार को आईआईटी बॉम्बे में सभी व्याख्यान रद्द रखने की जानकारी भी सामने आई।
आईआईटी बॉम्बे ने अपने पहले बयान पर माफी क्यों मांगी?
मामले में सोमवार को एक बड़ा बदलाव आया। आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर अपने शुरुआती बयान पर माफी मांगी। साथ ही प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला की डीन पद की जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। यह फैसला आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे ने लिया।
संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियां अभी संबंधित अधिकारियों की जांच के अधीन हैं। आईआईटी बॉम्बे ने माना कि उचित जांच पूरी होने से पहले छात्र की मौत से पहले की घटनाओं को लेकर विवरण देना या उनका किसी तरह चरित्रांकन करना उचित नहीं था।
संस्थान ने एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल पर कहा कि वह साहिल की मौत से जुड़ी अपनी पिछली सूचना में दिए गए बयानों के लिए माफी मांगता है। इससे पहले संस्थान ने अपने बयान में परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर डालने की बात कही थी। बाद में संस्थान ने स्पष्ट किया कि घटना से पहले की परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं।
क्या आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने भी इस्तीफा दिया?
मामले के बीच सोमवार को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे के इस्तीफे की खबर भी सामने आई। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने इस खबर को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
प्रोफेसर के समर्थन में निकाला गया मार्च?
सोमवार को संस्थान के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण के समर्थन में मार्च निकाला। आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत ने बयान जारी कर कहा कि प्रो. डूला को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जांच को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हटाया गया है। फोरम ने कहा कि डूला अभी भी संस्थान के फैकल्टी सदस्य हैं।






