पश्चिम एशियाई देशों के छात्रों की क्या मांगें? याचिका पर SC ने CBSE और केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों में पढ़ने वाले सीबीएसई कक्षा 12 के छात्रों की ओर से दायर याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नोटिस जारी किया है। छात्रों ने 2026 की बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया क्षेत्रीय संघर्ष से प्रभावित होने का हवाला देते हुए कई तरह की राहत देने की मांग की है।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और सीबीएसई से जवाब मांगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई से पहले याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया।

आखिर छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?

याचिका अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और पश्चिम एशियाई देशों में पढ़ने वाले हजारों सीबीएसई छात्रों को क्षेत्रीय संघर्ष के कारण अभूतपूर्व परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। याचिका के मुताबिक:

  • क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष ने परीक्षा प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
  • कई छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई।
  • छात्रों को मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।
  • कुछ छात्र विस्थापन जैसी परिस्थितियों से भी प्रभावित हुए।
  • इन परिस्थितियों का असर उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ा है।

छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से कौन-कौन सी राहत मांगी है?

याचिका में प्रभावित छात्रों के लिए कई विशेष राहतों की मांग की गई है। इनमें शामिल हैं:

  • एकमुश्त ग्रेस मार्क्स या अतिरिक्त अंक दिए जाएं।
  • विशेष पुनर्परीक्षा आयोजित की जाए।
  • विशेष सुधार परीक्षा (इम्प्रूवमेंट एग्जाम) कराई जाए।
  • छात्र किसी भी संख्या में विषय चुन सकें।
  • छात्रों को दोनों परिणामों में से बेहतर परिणाम रखने की अनुमति मिले।
  • किसी भी छात्र का शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।
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मूल्यांकन प्रक्रिया पर क्या सवाल उठाए गए हैं?

याचिका में 27 मार्च को जारी सीबीएसई की मूल्यांकन योजना को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:

  • मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली प्रभावित छात्रों के हितों के अनुकूल नहीं है।
  • परिणाम छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमता को नहीं दर्शाते।
  • इससे उच्च शिक्षा में प्रवेश के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
  • मूल्यांकन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और भेदभाव रहित होनी चाहिए।

प्रवेश नियमों में किस तरह की छूट मांगी गई है?

याचिका में विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों के लिए लागू विभिन्न प्रवेश योजनाओं में भी राहत देने की मांग की गई है।

  • डीएएसए (DASA) योजना के तहत मांग
    • 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अंकों की शर्त घटाकर 60 प्रतिशत की जाए।
  • सीआईडब्ल्यूजी (CIWG) श्रेणी के तहत मांग
    • खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के बच्चों को भी प्रवेश नियमों में विशेष छूट दी जाए।

क्या विशेष काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया की भी मांग हुई है?

याचिका में यह भी कहा गया है कि:

  • विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान प्रभावित छात्रों के आवेदन खारिज न करें।
  • जहां जरूरत हो वहां अस्थायी प्रवेश (प्रोविजनल एडमिशन) दिया जाए।
  • संशोधित परिणाम और विशेष परीक्षाओं के बाद अलग से काउंसलिंग विंडो खोली जाए।
  • किसी भी छात्र का एक साल खराब न होने दिया जाए।

छात्रों ने पहले भी उठाई थी आवाज?

याचिका में दावा किया गया है कि:

  • छात्रों, अभिभावकों और सामुदायिक संगठनों ने पहले भी सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय को कई ज्ञापन भेजे थे।
  • इसके बावजूद प्रभावित छात्रों के लिए कोई व्यापक राहत व्यवस्था नहीं बनाई गई।
  • युद्ध जैसे हालात और मानसिक दबाव ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया।
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हजारों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य ऐसी परिस्थितियों की वजह से खतरे में पड़ गया है, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इसी कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


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