दिवाली पर पटाखों के साथ पोटाश और कार्बाइड गन से जश्न जनजीवन खतरे में डाल सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के नेत्र रोग और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने लोगों को चेताया है।
एम्स दिल्ली के पूर्व नेत्र सर्जन डॉ. डॉ. ब्रजेश लहरी के मुताबिक विस्फोट से निकलने वाले रसायनिक पदार्थ और आग पहले आंखों की बाहरी सतह तो नुकसान पहुंचाते हैं। इसके बाद कॉर्निया, लेंस, रेटिना और भीतरी नसों तक इसका असर पहुंचता है। रसायन के अधिक गर्म होने की वजह से कॉर्निया की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। एम्स दिल्ली की नेत्र सर्जन डॉ. नम्रता ने बताया कि इसे खेती को पक्षियों से बचाने के लिए बनाया गया था। लेकिन यह दिवाली के जश्न का हिस्सा बन गई।
10 लोगों ने गवाईं थी आंखें
एम्स गोरखपुर के नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिचा अग्रवाल बताती हैं कि पिछले वर्ष करीब 60 लोग आंखों में चोट के साथ आए थे। ये अब तक की सबसे अधिक संख्या है। इसमें से 20 लोग पोटश गन से गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसमें से 10 लोगों की देखने की क्षमता शून्य हो गई थी।
उधर, मध्य प्रदेश, हरियाणा व उत्तराखंड के डॉक्टरों ने भी हैरान करने वाले दावे किए हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अदिति दुबे के मुताबिक हर साल दिवाली के दौरान दर्जनों लोग आतिशबाजी से घायल होकर पहुंचते हैं। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से पोटाश गन पर रोक लगाई गई है। उत्तराखंड के देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रुद्रपुर और हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले के अस्पतालों से हर वर्ष दिवाली के दौरान 100 से भी अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है।








