चेतावनी: फिर बढ़ने लगा ‘आपातकाल’ की वजह बनने वाला संक्रमण, भारत-यूके में मिले 2 मामले ,जताई चिंता

Spread the love

हाल के वर्षों में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों ने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाई है। करीब 4 साल तक कोरोनावायरस का प्रकोप रहा हो या फिर बीते महीनों कई देशों में देखा गया फ्लू का नया स्ट्रेन, इन सब के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा गया। बीते कुछ वर्षों में मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) भी एक गंभीर खतरा बनकर उभरा है। इसके तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए पहले जुलाई 2022 में और फिर 14 अगस्त 2024 को मंकीपॉक्स को ‘स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया गया था।

एमपॉक्स का संक्रमण एक बार फिर से उभरने लगा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत और यूके में मंकीपॉक्स के दो नए मामलों की पुष्टि की है। इन मामलों के लिए नए पहचाने गए रिकॉम्बिनेंट एमपॉक्स वायरस स्ट्रेन को जिम्मेदार माना गया है।

गौरतलब है कि एक-दो दशक पहले तक मंकीपॉक्स को मुख्यरूप से अफ्रीकी क्षेत्रों में फैलने वाले संक्रमण के रूप में जाना जाता था, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ये यूके-यूएस, भारत सहित कई अन्य देशों में भी तेजी से बढ़ता देखा गया है।

 

भारत-यूके में सामने आए संक्रमण के मामले

हालिया मामलों की बात करें तो डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि रिकॉम्बिनेंट एमपॉक्स वायरस के दो नए मामलों का पता चलना बताता है कि हमें लगातार जीनोमिक सर्विलांस की जरूरत है। पूरी दुनिया में पब्लिक हेल्थ रिस्क असेसमेंट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

  • पहला मामला यूनाइटेड किंगडम में रिपोर्ट किया गया था, जिसकी साउथ-ईस्ट एशिया के एक देश की ट्रैवल हिस्ट्री थी। शुरुआती लैब टेस्टिंग में वायरस की पहचान क्लेड Ib के तौर पर हुई, लेकिन बाद में होल जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चला कि इसमें क्लेड Ib और क्लेड IIb दोनों स्ट्रेन के जेनेटिक हिस्से थे।
  • वहीं दूसरा मामला भारत में रिपोर्ट किया गया है, जिसकी अरब पेनिनसुला के एक देश ट्रैवल हिस्ट्री रही है।
और पढ़े  बंगाल में 45 दिन में एक्शन: BSF-SSB को मिली 1,129 एकड़ जमीन, अमित शाह ने बताया कैसे मजबूत होगी सीमा सुरक्षा?

डब्ल्यूएचओ ने कहा  बार-बार सीक्वेंसिंग से नतीजों की पुष्टि हुई है कि वायरस रिप्लीकेट कर सकता है और इसके और ज्यादा फैलने की आशंका हो सकती है।

 

क्या कहता है डब्ल्यूएचओ

यहां जानना जरूरी है कि रीकॉम्बिनेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। ये तब होता है जब दो मिलते-जुलते वायरस एक ही व्यक्ति को संक्रमित करते हैं और जेनेटिक मटीरियल एक्सचेंज करते हैं, जिससे एक नया वेरिएंट बनता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, जीनोमिक एनालिसिस से पता चलता है कि दोनों व्यक्ति एक ही रीकॉम्बिनेंट स्ट्रेन से बीमार पड़े। इससे पता चलता है कि और भी ऐसे मामले हो सकते हैं जिनका पता नहीं चला हो।

  • डब्ल्यूएचओ ने कहा, अब तक बस दो मामले सामने आए हैं।
  • रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन के कारण मंकीपॉक्स संक्रमण के फैलने या क्लिनिकल लक्षणों के बारे में कोई नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि हम मंकीपॉक्स के मामलों पर गंभीरता से नजर बनाए हुए हैं।
  • दोनों संक्रमितों में क्लिनिकल लक्षण पहले से होने वाले संक्रमण के जैसे ही देखे गए हैं।

 

मंकीपॉक्स के बारे में जान लीजिए

एमपॉक्स जिसे मंकीपॉक्स भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रामक रोग है जो निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है।

  • मंकीपॉक्स एक खतरनाक और जानलेवा संक्रामक रोग है, इसका संक्रमण दर अधिक है जिसके कारण अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो ये काफी तेजी से बढ़ सकता है।
  • इसके लक्षणों में बुखार, लिंफ नोड्स में सूजन, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते और पीठ दर्द शामिल हैं। यह मुख्य रूप से त्वचा से त्वचा के संपर्क से फैलता है।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार अकेले सितंबर 2025 में, डब्ल्यूएचओ के सभी क्षेत्रों के 42 देशों ने कुल 3,135 पुष्ट मामलों की सूचना दी, जिनमें 12 मौतें शामिल हैं।
  • इससे पहले पिछले साल भी कई देशों में एमपॉक्स संक्रमण का कई देशों में प्रकोप देखा गया था।
और पढ़े  बंगाल में TMC नेता पर हमला: FIR में धोखाधड़ी, जबरन वसूली और धमकी जैसे आरोप, अदालत ने 14 दिन की हिरासत में भेजा

 

नए स्ट्रेन बढ़ा रहे हैं चिंता

गौरतलब है कि क्लेड I और क्लेड II एमपॉक्स के दो प्रमुख स्ट्रेन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लेड I की संक्रामकता और मृत्यु दर दोनों चिंता बढ़ाने वाली है। सबसे पहले क्लेड I संक्रमण के मामले अफ्रीकी देश कांगो में देखे गए थे, जिसके बाद से ये  पूरी दुनिया में बढ़ता जा रहा है।

सितंबर 2024 में, भारत में (केरल के मलप्पुरम में) भी क्लेड 1b स्ट्रेन का पहला मामला दर्ज किया गया था।

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक पोस्ट में बताया, एमपॉक्स का संक्रमण यौन संपर्कों को अलावा प्रभावित वस्तुएं, संक्रमित के निकट संपर्क और शरीर के तरल पदार्थों के माध्यम से भी फैल सकता है।
  • संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग की गई वस्तुएं जैसे कपड़े, चादर, तौलिए आदि के इस्तेमाल से बचें।
  • संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ या घाव के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है।
  • सामुदायिक तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

Spread the love
  • Related Posts

    नेपाल बाढ़ से तबाही: 105 भारतीयों समेत 291 विदेशी पर्यटक लापता,7 की मौत, कई गांव तबाह

    Spread the love

    Spread the loveउत्तरी नेपाल की भोटे कोशी नदी में बुधवार को अचानक बाढ़ आ गई। जिसमें सात लोगों की शव मिले हैं। वहीं, 384 यात्रियों लापता है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक…


    Spread the love

    टीएमसी के बागी सांसदों की बढ़ीं मुश्किलें, लोकसभा सचिवालय ने भेजा नोटिस

    Spread the love

    Spread the loveलोकसभा सचिवालय ने TMC के 20 बागी सांसदों को अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं पर नोटिस भेजकर सात दिनों में जवाब मांगा है। इन सांसदों…


    Spread the love