उत्तराखंड हाईकोर्ट: हल्द्वानी शिफ्टिंग की योजना को लगा तगड़ा झटका, 30 हेक्टेयर वन भूमि प्रस्ताव खारिज

उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना को एक बार फिर झटका लगा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति (आरईसी) ने लामाचौड़-भाखड़ा रेंज में हाईकोर्ट परिसर बनाने के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वन संरक्षण अधिनियम के तहत गैर-वन भूमि के विकल्पों की पर्याप्त तलाश नहीं की गई है। इस प्रस्ताव में बेलबाबा क्षेत्र में 123 पेड़ काटने की बात भी कही गई थी।

यह पहली बार नहीं है जब हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने का प्रस्ताव खारिज हुआ है। इससे पहले 24 जनवरी 2024 को गौलापार में 26 हेक्टेयर वनभूमि पर हाईकोर्ट परिसर बनाने का प्रस्ताव भी 4,238 पेड़ों के कटान के कारण खारिज कर दिया गया था। बताया जाता है कि क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने प्रस्ताव में गैर-वन भूमि के विकल्पों को पर्याप्त रूप से नहीं तलाशे जाने पर आपत्ति जताई।

जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार को गैर-वन भूमि उपलब्ध न होने का प्रमाणपत्र दिया था लेकिन समिति के अनुसार यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वैकल्पिक गैर-वन भूमि की विधिवत तलाश की गई थी या नहीं।

 

इस फैसले से हल्द्वानी के लोगों को निराशा हाथ लगी है। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा कहते हैं हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर रोक लगने से निश्चित रूप से विकास थमेगा। उनका कहना है कि शिफ्टिंग के लिए जिला प्रशासन अब हल्द्वानी में गैर वानिकी भूमि तलाश करे।

प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश प्रभारी वीरेंद्र गुप्ता का भी मानना है कि यदि हाईकोर्ट बेलबाबा में शिफ्ट होता तो इस क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं में इजाफा होता जिसका लाभ स्थानीय लोगों और यहां आने वाले वादकारियों और अधिवक्ताओं को मिलता।

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कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
नैनीताल के डीएम ने बेलबाबा क्षेत्र में हाईकोर्ट शिफ्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट के अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत की थी और हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने पिछले दिनों खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट शिफ्टिंग के पीछे मुख्य रूप से नैनीताल में स्थानाभाव, नैनीताल के प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण वहां आवास और होटल आदि का महंगा होना और पर्यटक सीजन के दौरान शहर में लगने वाला जाम प्रमुख कारण थे।

केंद्र को भेजे प्रस्ताव का ब्यौरा
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट शिफ्टिंग के लिए केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार 30 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के रूप में 3 करोड़ 68 लाख 57 हजार 700 रुपये निर्धारित किए गए थे। वहीं क्षतिपूरक वनीकरण के लिए विभिन्न तहसीलों और क्षेत्रों में 60 हेक्टेयर गैर-वन भूमि चिह्नित की गई थी जिसकी अनुमानित लागत 3 करोड़ 46 लाख 45 हजार 883 रुपये बताई गई थी। परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 1,450 लोगों को स्थायी रोजगार और 4,98,546 मानव-दिवस के बराबर अस्थायी रोजगार मिलने की संभावना भी प्रस्ताव में बताई गई थी।

हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर केंद्र की रोक लगने संबंधी कोई लिखित सूचना अभी उपलब्ध नहीं है। मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। – दीपक रावत, आयुक्त, कुमाऊं मंडल

 

 

बेलबाबा में हाईकोर्ट शिफ्टिंग पर रोक लगने संबंधी जानकारी सोशल मीडिया से मिल रही है। विधिवत रूप से जिला प्रशासन के पास अभी ऐसी कोई सूचना नहीं है। – ललित मोहन रयाल, डीएम, नैनीताल

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