उत्तराखंड / हल्द्वानी : शहीद चंद्रशेखर हर्बोला- वादा किया जल्दी आने का लगा दिए 38 साल,खबर सुन फफक पड़ी पत्नी शांति देवी

Spread the love

शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला की पत्नी शांति देवी आज 66 साल की हो गई हैं। उन्होंने 38 साल बाद पति की खबर सुनी तो वे भावुक हो गई। उन्होंने कहा कि वे जल्दी आने का वादा कर गए थे, लेकिन 38 साल लगा दिए। उन्होंने कहा कि अब जब फिर से उनके पार्थिव शरीर मिलने की सूचना मिली है तो फिर 1984 का मंजर सामने आ गया है। फिर वही दृश्य सामने आ रहे हैं। वो समय फिर याद आ रहा है कि जनवरी 1984 में जाने से पहले उन्होंने कहा था कि मैं इस बार जल्दी घर आऊंगा… और 38 साल बाद वो घर आ रहे हैं।
उनकी ससुराल द्वाराहाट तो मायका हवालबाग में है। जब उनको 1984 में उनको अपने पति के निधन की सूचना मिली थी तब वह अपनी ससुराल द्वाराहाट में थीं। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी शादी को हुए मुश्किल से 6 साल हुए थे। पति फौज की नौकरी में थे। इसलिए घर कम ही आ पाते थे।
छह साल की शादी में तब ही मिल पाती थीं जब वो छुट्टी में घर आते थे। बताया कि यह घटना घटित होने से पहले वह अंतिम बार जनवरी 1984 में करीब एक महीने के लिए गांव में आये थे। अपने दोस्तों, परिजनों और रिश्तेदारों से मिले थे। तब उनकी दो बेटियां थीं। बड़ी बेटी साढ़े चार साल की और छोटी बेटी डेढ़ साल की थी। इसके बाद जब वापस ड्यूटी पर जाने लगे तब उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि इस बार मैं जल्दी घर आने की सोच रहा हूं।
अगर हो सका तो गर्मियों में आऊंगा। घर से जाने के बाद उनका उनके पति से कोई संपर्क नहीं हुआ। शांति देवी ने बताया कि तब आज के समय की तरह टेलीफोन और मोबाइल की इतनी व्यवस्था नहीं थी। फोन पर अपने किसी परिचित से बात कर लो ये एक आम व्यक्ति के लिए संभव नहीं हो पाता था। सूचनाओं का लेन-देन चिट्ठियों से हो पाता था और जरूरी सूचना टेलीग्राम से मिलती थी।

और पढ़े  सख्ती: पंचायतों का नक्शा पास कराने का अधिकार खत्म, रेरा पोर्टल से होगी मानचित्र स्वीकृति

टेलीग्राम से आने वाली सूचनाओं को अधिकतर अशुभ ही माना जाता था। शांति देवी ने बताया कि उनके गांव में यह कहा जाता था किसी के घर टेलीग्राम न आये, लेकिन 29 मई 1984 को उनके लिए भी टेलीग्राम से सूचना मिली। उन्हें पता चला कि उनके पति का निधन सियाचिन में हो गया है। उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पति अपने पीछे दो बेटियों को छोड़ गए थे। शांति देवी ने बताया कि दोनों बेटियों का लालन-पालन बहुत जिम्मेदारी के साथ किया।

ससुराल वालों ने पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि अंतिम समय में उनके पार्थिव शरीर को नहीं देख पाने का दुख हमेशा के लिए था लेकिन एक बात जेहन में रहती थी की कभी ना कभी उनके पार्थिव शरीर को देखने का अवसर मिलेगा। बताया कि समय बीतता गया। दोनों बेटियां को लेकर उनका परिवार हल्द्वानी के सरस्वती विहार में 1995 आकर रहने लगा। बड़ी होने पर दोनों बेटियों की शादी कर दी।


Spread the love
  • Related Posts

    रुड़की- नदी में नहाने गए 13 साल के बच्चे को मगरमच्छ ने मार डाला, शरीर पर दांत से काटने के मिले निशान

    Spread the love

    Spread the loveक्षेत्र के ग्राम बंजारेवाला में नदी में नहाने गए किशोर पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया जिससे उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को किशोर का शव नदी में…


    Spread the love

    टिहरी- गंगोत्री जा रहे यात्रियों से भरे टेंपो ट्रैवलर के हुए ब्रेक फेल, पहाड़ी से टकराया

    Spread the love

    Spread the love   दिल्ली से गंगोत्री जा रहा एक टेंपो ट्रैवलर नगुन-सुवाखोली मोटर मार्ग पर नागराजा धार के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार पांच यात्री…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *