वहीं दूसरे ऑटो में बैठे चार लोग घायल हो गए। घायलों को एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और कालिंदी विहार के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चार की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे के बाद लंबा जाम लग गया।
हाथरस के धाधऊ गांव निवासी रामअवतार (70) ने बताया कि गांव के आठ लोगों के साथ वह 20 जनवरी को धार्मिक यात्रा पर निकले थे। जगन्नाथपुरी से दर्शन के बाद चित्रकूट पहुंचे थे, जबकि उनके एक साथी हरिहर जबलपुर में ही रुक गए थे। चित्रकूट से महाकौशल एक्सप्रेस से शनिवार सुबह आठ लोग आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे।
गांव के बृजमोहन उर्फ बिज्जो (52), धनप्रसाद (60), लखमीचंद्र (62), देवकीन देवकीनंदन उर्फ बिल्ला मिस्त्री (60), विजय सिंह (62), रनवीर (75) और उदयवीर सिंह (60) कैंट स्टेशन पर उतर गए जबकि रामअवतार राजामंडी स्टेशन तक गए। सात लोगों ने कैंट स्टेशन से सादाबाद के लिए आजमपाड़ा, शाहगंज निवासी शाहिद (40) का ऑटो बुक किया था। चालक रामबाग होते हुए सवारियों को लेकर टेढ़ी बगिया से जलेसर रोड पर आया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गांव नगला चंदन के पास एक ऑटो श्रद्धालुओं के ऑटो से आगे चल रहा था। तभी शाहिद ने ऑटो को ओवरटेक करने का प्रयास किया। जलेसर से आगरा की ओर तेज रफ्तार से आ रहे कंटेनर ने दोनों ऑटो को एक के बाद एक टक्कर मार दी। धमाके की आवाज के साथ दोनों ऑटो कई फीट उछलकर सड़क किनारे गड्ढे में पेड़ों के बीच जा गिरे।
लोगों ने पीछा कर कंटेनर पर पथराव किया
दोनों के परखच्चे उड़ गए। आसपास के दुकानदार और राहगीर दौड़ पड़े। वहीं, चालक कंटेनर लेकर भागने लगा। लोगों ने पीछा कर कंटेनर पर पथराव कर दिया, तब चालक अवनीश निवासी खेरगढ़ शिकोहाबाद ने कंटेनर रोका। लोगों ने कहा- वह नशे की हालत में था। ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। बाद में पुलिस ने आकर उसे हिरासत में लिया।
उदयवीर की इलाज के दौरान मौत
डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह ने बताया कि हादसे में बृजमोहन, लखमीचंद्र, रनवीर, देवकीनंदन और शाहिद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उदयवीर और रिटायर्ड दरोगा विजय सिंह को ट्रांस यमुना इलाके एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उदयवीर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
विजय सिंह की हालत गंभीर है। एक अन्य घायल धनप्रसाद को एसएन में भर्ती कराया गया, जहां से परिजन निजी अस्पताल में ले गए। वहीं दूसरे ऑटो का चालक रुनकता निवासी मन्नू, हसीना, रानी और सलमान घायल हो गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देख सके लखमीचंद्र
हादसे में मृत पंडित लखमीचंद्र (70) के परिवार में पत्नी, दो बेटे व एक बेटी है। एक बेटे व एक बेटी की शादी हो चुकी है। परिजनों ने बताया कि छोटे बेटे की शादी के लिए लड़की देख रहे थे, इसलिए सभी परिजन बेसब्री से उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही हादसे की जानकारी मिली तो परिवार में रोना-बिलखना शुरू हो गया। पिता लखमीचंद्र द्वारा छोटे बेटे के सिर पर सेहरा न देख पाने का गम परिवार को खाए जा रहा है।
पौत्री के बाद दादा की मौत से मातम
रनवीर सिंह (75) की पौत्री राधिका (14) पुत्री प्रताप सिंह की बीमारी के चलते तीन जनवरी को मृत्यु हो गई थी। राधिका अपने दादा की लाडली थी। पौत्री की मौत से वे काफी टूट गए थे। इसलिए अपने मित्रों के साथ धार्मिक यात्रा पर निकल गए थे। लौटते समय हुए हादसे में रनवीर सिंह की भी मौत हो गई। एक महीने में दो मौतों से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में पत्नी व तीन बेटे हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। यह परिवार किसान है।
पुलिस में नौकरी से घर आई थीं खुशियां
बृजमोहन गौतम उर्फ बिज्जो (52) की भी इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। उनके परिवार में दो बेटे व पत्नी हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि छोटे बेटे की पिछले वर्ष ही उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी लगी थी तथा वह ट्रेनिंग पर गाजियाबाद गया है। बड़ा बेटा पिता के साथ खेतीबाड़ी संभाल रहा था। छोटे की नौकरी से बृजमोहन व घर के लोग खुश थे, लेकिन उनके जाने से परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया।
परिवार की खुशियों के लिए मांगी थी मन्नत
देवकीनंदन (65) के परिवार में पत्नी व दो बेटे हैं, वह चार बेटियों की शादी कर चुके थे। बड़े बेटे की भी शादी हो चुकी है। परिवार दूसरे बेटे की शादी की तैयारी कर रहा था। देवकीनंदन के साथ दोनों बेटे खेती का काम संभालते थे। परिजनों ने बताया कि वह कई वर्षों से जबलपुर की कथा में जाने की कह रहे थे, क्योंकि उन्होंने परिवार की खुशियों के लिए मन्नत मांगी थी। इसीलिए हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में इस बार वह भी शामिल हुए।
मां के बाद परिवार से उठा पिता का साया
हादसे में मृत उदयवीर सिंह (62) के दो बेटे व एक बेटी है। सभी शादीशुदा हैं, उदयवीर भी किसान थे। तीन साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। मां के गम से परिवार उभरा ही था कि अब सिर से पिता का साया उठा गया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
दवा ने बचा ली रामअवतार की जान
आगरा स्टेशन से रामअवतार (70) भी टेंपो में बैठे थे, लेकिन उन्हें टेढ़ी बगिया से दवा लेनी थी। दवा लेने में देर हो जाती, इसलिए वे टेंपो से उतर गए और साथियों को गांव के लिए रवाना कर दिया। इस बारे में उन्होंने साथियों को बोला था कि घर पर खबर कर दे दें। जब इसकी जानकारी परिजनों को हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली। दवा ने उनकी जान बचा ली।
दो घायलों के परिजन पहुंचे
इस हादसे में सेवानिवृत्त दारोगा विजय सिंह (65) निवासी गांव धाधऊ और धनप्रसाद (65) निवासी नगला मनी घायल हैं। दोनों का उपचार आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। दोनों घायलों के परिजन व रिश्तेदार सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इसमें धन प्रसाद की हालत अधिक गंभीर बताई जा रही है।
हादसे में छह लोगों की मौत हुई है। कंटेनर कोलकाता जा रहा था। ब्रेथ एनालाइजर से जांच में चालक के नशे में होने की पुष्टि नहीं हुई है। लोगों के आरोप के आधार पर जांच के लिए खून का सैंपल लिया गया है।-रामबदन सिंह, अपर पुलिस आयुक्त, आगरा