डोडा जिले में खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान ने वीरवार (गुरुवार) को 10 घरों का चिराग बुझा दिया। जब पूरा देश कड़ाके की ठंड से ठिठुर रहा था तब देश की रक्षा में तैनात ये जांबाज अपनी ड्यूटी की ओर बढ़ रहे थे लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। खन्नी टॉप इलाके में उनका वाहन हादसे का शिकार हो गया। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं बल्कि उन पहाड़ी रास्तों की बेबसी की कहानी भी है जहां एक चूक और सुरक्षा इंतजामों की कमी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। खन्नी टॉप ऊंचाई पर स्थित है, जहां सर्दियों में तापमान लगातार शून्य से नीचे रहता है। रात के समय सड़क पर पानी जमकर बर्फ की परत बन जाता है। इस बर्फ को ब्लैक आइस कहा जाता है।
न पैराफिट, न संकेतक काश! वहां एक दीवार होती
डोडा जिले भद्रवाह में प्रकृति की मार और दुर्गम भौगोलिक स्थिति ने वीरवार को सेना के बुलेटप्रूफ वाहन को भीषण सड़क हादसे में धकेल दिया। हादसे वाली जगह का मंजर देख हर आंख नम थी। सड़क के उस खौफनाक मोड़ पर न तो कोई सुरक्षा दीवार (पैराफिट) थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।









