चमोली: श्रीनंदादेवी राजजात के आयोजन के लिए बनी समन्वय समिति, कुलसारी मंदिर परिसर में हुई बैठक

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गामी वर्ष 2027 में प्रस्तावित हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात के लिए बधाण क्षेत्र में समन्वय समिति का गठन किया गया। इस समिति को आयोजन, परंपराओं, राजजात और नंदा जात में हकहकूकों को लेकर समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति समन्वय बनाएगी की आयोजन इस वर्ष होगा या आगामी वर्ष।समन्वय समिति का गठन करते हुए सुशील रावत को अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। बैठक में 14 सयानों, कुरुड़ के पुजारियों सहित कई लोग शामिल रहे।

कुलसारी मंदिर परिसर में कुलसारी पड़ाव समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि श्रीनंदा देवी राजजात के लिए कई भ्रांतियां लोगों में है। यहां वक्ताओं ने राजा की मनौती को राजजात के परिपेक्ष्य में सही ठहराया। बैठक में कहा गया कि आगामी 2026 में होने वाली लोकजात को भव्य रूप में आयोजित किया जाए।

और वर्ष 2027 में प्रस्तावित श्रीनंदा राजजात के लिए सभी पड़ावों पर विकास योजनाओं को समय पर पूरा किया जाएगा। समन्वय समिति में कर्णप्रयाग, थराली, देवाल तथा नंदानगर (घाट) के ब्लॉक प्रमुखों को समिति के संरक्षक के रूप में चुना गया जबकि मंशाराम गौड़ को समिति के आमंत्रित सदस्य में शामिल किया गया है। वहीं कुरुड़, वाण, बधाणगढ़ी और देवराड़ा मंदिर समिति के अध्यक्षों को पदेन उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। 

बड़ी जात और राजजात के बीच चलती रही बातें

बैठक में बधाण पट्टी के 14 सयाने, सिद्धपीठ कुरुड़ और देवराड़ा के पुजारी गौड़ ब्राह्मण, राजजात और बड़ी जात समिति के पदाधिकारी तथा यात्रा पड़ाव समितियों के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कुछ लोगों ने कहा कि परंपरा के अनुसार बड़ी जात अपने निर्धारित समय वर्ष 2026 में ही होनी चाहिए। अधिकतर लोगों का कहना है कि 2025 में आई आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुए यात्रा मार्गों का सुधारीकरण नहीं हो पाया है। विशेषकर निर्जन हिमालीय क्षेत्र में यात्रा मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में श्रीनंदा देवी राजजात का आयोजन जोखिमभरा हो सकता है। इसलिए इसपर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए। अधिकतर लोगों ने कहा कि यात्रा पड़ावों के अवस्थापना विकास के बगैर राजजात का आयोजन 2026 में होना मुश्किल है। इसलिए राजजात 2027 में ही होनी चाहिए।

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नवगठित समिति के लिए समन्वय से लेकर सहमति तक की होगी चुनौती
अस्था, विश्वास के साथ ही रोमांच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात को लेकर सभी समितियां एक साथ हों इसके लिए सोमवार को समन्वय समिति बना दी गई है। अब इस नवगठित समन्वय समिति के सामने आयोजन को लेकर समन्वय ही नहीं बल्कि श्रीनंदा देवी राजजात को लेकर सहमति तैयार करने की भी चुनौती होगी। हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात पिछले वर्ष 2014 में हुई तो ऐसे में वर्ष 2026 में राजजात के आयोजन की संभावनाएं थीं लेकिन वसंत पर नौटी में राजकुंवरों ने राजजात के लिए वर्ष 2027 में किए जाने मनौती की जबकि मां नंदा के मंदिर कुरुड़ समिति ने वर्ष 2026 में ही बड़ी जात करने की बात कही। ऐसे में विवाद की स्थिति बन गई। इसे लेकर अब 14 सयानें, 12 थोकी ब्राह्मण और अन्य हक हकूकधारी सामने आ गए हैं। कुलसारी की बैठक में समन्वय समिति बनाकर हिमालीय महाकुंभ के लिए एकजुट होने की बात कही गई। अब समिति के सामने बड़ी जात, राजजात सहित तमाम विवादों पर विराम लगाने की चुनौती होगी।

लोक जात हर वर्ष होती है इस बार इसे मॉडल के रूप में आयोजित किया जाएगा। साथ ही अगले वर्ष होने वाली राजजात के लिए समन्वय समिति बनी है। बधाण क्षेत्र में पड़ाव, मंदिर समितियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा। साथ ही राजजात में नए पड़ावों को शामिल करने, सभी पड़ावों पर विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सरकार से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। – सुशील रावत, नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीनंदा राजजात समन्वय समिति

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– हम किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं। सरकार की ओर से गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में सरकार समितियों, हकहकूधारियों की बैठक होनी है। साथ ही हम अभी वर्ष 2026 के जो भी कार्यक्रम जारी हुए हैं उसके हिसाब से तैयारी कर रहे हैं और व्यवस्थाएं बना रहे हैं। मैं कोई भी निर्णय नहीं ले सकता जो सभी का निर्णय होगा उसी के अनुसार आयोजन होंगे। – कर्नल हरेंद्र सिंह, नंदानगर।

श्रीनंदा देवी राजजात की शुरुआत, पड़ावों को मानचित्र पर शामिल किया जाना सहित कई मामलों में बनानी होगी सहमति कुरुड में वर्ष 2026 में बड़ी जात तो नौटी में राजकुंवर वर्ष 2027 में श्रीनंदा देवी राजजात की कर चुके हैं मनौती कुलसारी।

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