टिहरी जिले में 70 करोड़ का नुकसान
जिले में मानसून सीजन में जनधन की बड़ी क्षति हुई है। आपदा के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई है। 452 भवन भवन व गोशाला आंशिक और पूर्ण क्षतिग्रस्त हुए हैं। सैकड़ों नाली कृषि भूमि तबाह हुई है। विभिन्न विभागों की सार्वजनिक संपत्तियों को लगभग 70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आपदा से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 6 भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए है। प्रशासन की ओर से फौरी राहत के रूप में 35 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया। मुअवाजा वितरित किया जा चुका है।
चमोली जिले में तैयार की जा रही नुकसान की रिपोर्ट
जिले में आपदा से बीते ढाई माह में 11 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 14 घायल हुए हैं। थराली, देवाल, ज्योतिर्मठ, पोखरी, पीपलकोटी और नंदानगर क्षेत्र में भूस्खलन, भू-धंसाव व अतिवृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। मलबे में दबने से 19 पशुओं की मौत हो गई है। 16 आवासीय भवन पूर्ण व 116 भवन आंशिक रुप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 214 संपर्क मोटर मार्ग जगह-जगह भूस्खलन होने से क्षतिग्रस्त हुए हैं। आपदा से 140 परिवार प्रभावित हुए हैं।
212 से अधिक पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त, चार करोड़ का नुकसान
रुद्रप्रयाग जिले के उप तहसील बसुकेदार व पूर्वी बांगर क्षेत्र में अतिवृष्टि से 212 से अधिक पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई है। कुछ पेयजल योजनाओं के स्रोत भी तबाह हो गए। जल संस्थान को अब तक चार करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। अतिवृष्टि से डुंगर, तालजामण, स्यूंर, डांगी, उछोला, बडेथ, सुमाड़ी सहित 31 पेयजल योजनाओं को व्यापक क्षति पहुंची है।
राज्य में इस साल अब तक आपदा से पांच हजार करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान है। जिलों से नुकसान की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। पिछले साल की तुलना में इस बार कई गुना अधिक नुकसान प्रदेश में हुआ है।
-विनोद कुमार सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन
आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से प्रदेश में हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अभी तक वित्त विभाग को रिपोर्ट नहीं मिली है। लेकिन नुकसान की भरपाई के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
-दिलीप जावलकर, सचिव वित्त