Termination of Pregnancy – गर्भवती महिला सहमति से 20 हफ्ते बाद नहीं कर सकती गर्भपात की मांग.

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून में आपसी सहमति से गर्भवती महिला गर्भपात की अनुमति नहीं मांग सकती। अदालत ने कहा कि दुष्कर्म पीड़ित, जीवन को खतरा या शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट लगने की संभावना के चलते ही 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की मंजूरी कानून में है।

अदालत ने सहमति संबंध से गर्भवती 25 वर्षीय युवती के 23 सप्ताह के गर्भ को गिराने की मंजूरी के आग्रह को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। फिलहाल अदालत ने तय कानून के मुद्दे पर दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 26 अगस्त तय की है। पीठ ने कहा कि नोटिस केवल उस याचिका में प्रार्थना तक सीमित है जिसमें अविवाहित महिला को एमटीपी नियम के नियम 3बी के दायरे में शामिल करने का आग्रह किया गया है। पीठ ने युवती को यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि एक अविवाहित महिला जो एक सहमति से यौन संबंध से बच्चे को जन्म दे रही है उसे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003 (एमटीपी रुल्स) के अनुसार 20 सप्ताह से अधिक उम्र के गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति नहीं है।

महिला की अपील, मां बनने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं युवती ने यह कहते हुए अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग कर अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि वह सहमति से गर्भवती हुई है लेकिन बच्चे को जन्म नहीं दे सकती, क्योंकि वह अविवाहित है और उसके साथी ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया है। यह कहा गया कि विवाह के बिना बच्चे को जन्म देने से उसका बहिष्कार होगा और उसकी मानसिक पीड़ा बढ़ेगी। महिला ने यह भी कहा कि वह मां बनने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है और गर्भावस्था को जारी रखने से उसे गंभीर शारीरिक और मानसिक चोट पहुंचेगी।

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अदालत कानून का पालन करने के लिए बाध्य
पीठ ने कहा आज तक एमटीपी नियमों का नियम 3 बी लागू है और एक अविवाहित महिला की गर्भावस्था को 20 सप्ताह से अधिक समाप्त करने की अनुमति नहीं देता है और इसलिए अदालत कानून का पालन करने के लिए बाध्य है। पीठ ने कहा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी नियम को 2021 में संशोधित किया गया है। इसके तहत उन महिलाओं की श्रेणियों को प्रदान करता है जिनकी गर्भावस्था 20 सप्ताह से अधिक उम्र के कानूनी रूप से समाप्त की जा सकती है।

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