पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी पूंजी की निकासी और कमजोर कॉरपोरेट नतीजों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सुबह के कारोबार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती सत्र में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता घटने से बाजार पर भारी दबाव बना रहा। प्री-ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर आ गया; निफ्टी 533.55 अंक गिरकर 24,645.10 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे गिरकर 91.32 पर आ गया।
हालांकि बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1072.86 अंक या 1.32% गिरकर 80,214.33 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 333.90 अंक या 1.33% गिरकर 24,844.75 अंक पर आ गया।
निवेशकों के डूबे आठ लाख करोड़ रुपये
तेज गिरावट के चलते बाजार पूंजीकरण में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार शुरू होने के शुरुआती कुछ ही मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ से अधिक की कमी आ गई, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के ₹463.50 लाख करोड़ से घटकर करीब ₹455 लाख करोड़ पर आ गया।
प्री-ओपन में सेंसेक्स 6,000 अंक तक गिरा
सेंसेक्स के शेयरों का हाल

क्या है विशेषज्ञों की राय?
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच बाजारों की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि निवेशक बेहद अस्थिर माहौल में स्थिरता की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, “आज की गहराई से अनिश्चित दुनिया में बाजार किसी ठोस सहारे की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री के इस बयान कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा और नई ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ वार्ता फिर से शुरू करना चाहता है, इन खबरों से एशियाई बाजारों में शुरुआती भारी गिरावट के बाद जोखिम वाले एसेट्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली है।”
अजय बग्गा के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव का भारतीय बाजार पर तीन प्रमुख प्रभाव पड़ सकता है।
- पहला और सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, क्योंकि होरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए यह महंगाई, चालू खाता घाटा और कॉरपोरेट लागत बढ़ने का कारण बन सकता है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनेगा।
- दूसरा बड़ा प्रभाव भारत के खाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर पड़ सकता है। यदि शिपिंग रूट और सप्लाई चेन बाधित होती हैं, तो भारतीय निर्यातकों को नुकसान झेलना पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टरों को जो मध्य पूर्व पर निर्भर हैं।
- तीसरा जोखिम मध्य पूर्व में काम कर रहे लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार से जुड़ा है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर श्रम बाजार, रेमिटेंस फ्लो और भारतीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी
ईरान के खिलाफ अमेरिका-इस्राइल की सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में रिस्क-ऑफ माहौल को तेज कर दिया है, जिसका असर इस सप्ताह की शुरुआत में इक्विटी बाजारों पर साफ दिख सकता है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सोना, डॉलर और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। कमोडिटी बाजारों में, सोने की कीमतें 3 प्रतिशत बढ़कर 1,67,329 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) हो गईं, जबकि चांदी की कीमतें 3.89 प्रतिशत बढ़कर 2,85,700 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं।
एशियाई बाजारों में दिखी गिरावट
अन्य एशियाई बाजारों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.55 प्रतिशत गिरकर 57,930 के स्तर पर आ गया, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स सूचकांक 1.86 प्रतिशत गिरकर 4,903 के स्तर पर आ गया, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 26,113 पर आ गया और ताइवान का भारित सूचकांक 0.33 प्रतिशत गिरकर 35,297 के स्तर पर पहुंच गया।

अमेरिकी बाजारों में, डॉव जोन्स फ्यूचर्स 0.77 प्रतिशत गिरकर 48,593 पर आ गया, जो बिकवाली के दबाव का संकेत देता है। शुक्रवार को, एसएंडपी 500 सूचकांक 0.43 प्रतिशत गिरकर 6,878 पर आ गया, जबकि नैस्डैक 0.94 प्रतिशत गिरकर 22,663 के स्तर पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमतें बढ़कर 82.37 डॉलर हो गईं, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत में 7.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड वायदा में 7.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 71.86 डॉलर पर पहुंच गई।







