यूएन से आई चौंकाने वाली रिपोर्ट: युद्धों में बच्चों पर टूटा कहर, पहली बार सरकारी सेनाएं बनीं सबसे बड़ी दोषी

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संघर्ष और युद्ध क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दुनिया भर में करीब 25,000 बच्चे हत्या, यौन हिंसा, अपहरण और जबरन लड़ाई में भर्ती किए जाने जैसे गंभीर अपराधों का शिकार हुए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 30 वर्षों में पहली बार सरकारी सेनाएं बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाई गई हैं।

 

लगातार चौथे साल बढ़े बच्चों के खिलाफ अपराध
UN की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खिलाफ दर्ज गंभीर उल्लंघनों की संख्या लगातार चौथे वर्ष बढ़ी है। वर्ष 2025 में ऐसे 38,558 मामले सत्यापित किए गए, जिनमें बच्चों की हत्या, अपहरण, स्कूलों और अस्पतालों पर हमले तथा मानवीय सहायता रोकने जैसी घटनाएं शामिल हैं।

24 हजार से ज्यादा बच्चे हुए प्रभावित
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 24,174 बच्चे इन घटनाओं से प्रभावित हुए। इनमें लगभग एक-तिहाई लड़कियां थीं। कई बच्चों को एक साथ कई तरह की हिंसा और अत्याचारों का सामना करना पड़ा।

 

30 साल में पहली बार बदली तस्वीर
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों पर होने वाले अत्याचारों की निगरानी शुरू होने के तीन दशक बाद पहली बार सरकारी बल अधिकांश गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। पहले आमतौर पर सशस्त्र विद्रोही और आतंकी समूह ऐसे मामलों में प्रमुख दोषी माने जाते थे।

इस्राइली सेना सबसे ऊपर, कांगो दूसरे नंबर पर
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के दौरान सबसे ज्यादा 12,445 उल्लंघन इस्राइली सेना और उससे जुड़ी सुरक्षा एजेंसियों के खाते में दर्ज किए गए। इसके बाद डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में 4,114 मामले सामने आए। म्यांमार, सोमालिया और नाइजीरिया के विभिन्न सशस्त्र समूहों द्वारा भी 2,000 से अधिक गंभीर उल्लंघन किए गए। सूची में सूडान, दक्षिण सूडान, सीरिया और यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों का भी उल्लेख है।

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बच्चों की मौत और चोट के मामलों में भी सरकारी बल आगे
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सेनाएं 6,266 बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार पाई गईं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। वहीं 7,958 बच्चों के घायल होने की पुष्टि हुई है।

गाजा में हजारों बच्चों की मौत
संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि गाजा में इस्राइल सैन्य कार्रवाई के दौरान 2,668 फ़िलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई। इसके अलावा पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में 55 बच्चों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गाजा में 4,588 अतिरिक्त बच्चों की मौत और 346 इस्राइल बच्चों के घायल होने की खबरों की जांच अभी जारी है।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता
संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि वैनेसा फ्रेजियर ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का पैमाना बेहद चिंताजनक है और अब केवल चिंता जताने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सदस्य देशों से बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध की बदलती प्रकृति इसकी बड़ी वजह है। अब लड़ाइयां खुले मैदानों के बजाय घनी आबादी वाले शहरों और बस्तियों में लड़ी जा रही हैं। ड्रोन, मिसाइलों और भारी विस्फोटक हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर खतरा और बढ़ गया है।

हजारों बच्चों को जबरन बनाया गया लड़ाका
रिपोर्ट के अनुसार, 6,607 बच्चों को जबरन भर्ती कर युद्ध में इस्तेमाल किया गया। सबसे ज्यादा मामले कांगो, नाइजीरिया, हैती, सोमालिया और कोलंबिया में दर्ज हुए।

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अपहरण और यौन हिंसा भी बड़ी चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने 5,129 बच्चों के अपहरण की पुष्टि की है। सबसे अधिक मामले नाइजीरिया, कांगो, सोमालिया, म्यांमार और मोजाम्बिक में सामने आए। वहीं 1,783 बच्चे बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा के शिकार हुए। ऐसे मामलों में कांगो, नाइजीरिया, सोमालिया, सूडान और हैती सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र का संदेश: बच्चों की सुरक्षा का कोई विकल्प नहीं
रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें और अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुरंत ठोस कदम नहीं उठाते, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर हो सकता है।


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