वेनेजुएला में भूकंप से तबाही के चार दिन बाद भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी, अब तक 1450 की मौत

वेनेजुएला के उत्तरी राज्य ला गुआइरा में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के चार दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। स्थानीय और विदेशी बचाव दल मलबे में दबे लोगों को जीवित निकालने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। सरकार के मुताबिक, रविवार दोपहर तक 1,450 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की राहत व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। कई लोगों का कहना है कि शुरुआती बचाव कार्य आम नागरिकों और स्वयंसेवकों के भरोसे चला, जबकि सरकारी मदद देर से पहुंची।

हजारों लोग अब भी लापता
परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश के लिए अलग-अलग ऑनलाइन और स्थानीय डेटाबेस का सहारा ले रहे हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के बाद पहले 48 से 72 घंटे जीवित लोगों को बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि यदि मलबे में फंसे लोगों को पानी या भोजन मिल जाए तो उनके जीवित बचने की संभावना कुछ और दिनों तक बनी रह सकती है।
अमेरिका और फ्रांस की टीम ने बचाई दो जिंदगियां
रविवार सुबह अमेरिका और फ्रांस के बचावकर्मियों ने मलबे से एक व्यक्ति और उसके बेटे को सुरक्षित बाहर निकाला। दोनों धूल से लथपथ थे और उन्हें तुरंत एंबुलेंस में ले जाकर इलाज शुरू किया गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों में नई उम्मीद जगी।

दुनिया भर से पहुंच रही मदद, सुरक्षा बढ़ाई गई
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अनुसार, शनिवार तक दुनिया के कई देशों से 2,200 से अधिक बचावकर्मी वेनेजुएला पहुंच चुके थे और अन्य टीमें भी लगातार आ रही हैं। अमेरिका, फ्रांस, मैक्सिको, ब्राजील और अल सल्वाडोर समेत कई देशों ने राहत और बचाव कार्य में मदद भेजी है। सरकार ने बताया कि ला गुआइरा राज्य में 14,000 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश के लिए विशेष अनुमति जरूरी कर दी गई है। हालांकि कई स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी राहत अब भी पर्याप्त नहीं है।

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770 इमारतें ढहीं या क्षतिग्रस्त, नागरिक भी बचाव अभियान में जुटे
सरकार के मुताबिक, भूकंप से 770 से अधिक इमारतें पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गई हैं। यह संख्या शुक्रवार को जारी आंकड़ों से लगभग दोगुनी है। कई लोग अब भी टूटे मकानों के पास खड़े होकर अपने परिजनों के नाम पुकार रहे हैं। तेज गर्मी और शवों के सड़ने से इलाके में बदबू फैलने लगी है। सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण कई स्वयंसेवक मोटरसाइकिल के हेलमेट पहनकर मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं। कुछ जगहों पर लोगों ने सरकारी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। आरोप है कि कुछ अधिकारी क्षतिग्रस्त इमारतों के सामने तस्वीरें खिंचवाकर बिना मदद किए लौट गए।

लगातार आ रहे झटकों से बढ़ी तबाही, मलबे के बीच उम्मीद कायम
विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई में आए दो तेज भूकंपों के कारण नुकसान बहुत अधिक हुआ। पिछले कई दिनों से छोटे-छोटे झटके भी महसूस किए जा रहे हैं। शनिवार को 4.8 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया। राहतकर्मियों के पहुंचने से कई परिवारों की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। एक महिला, जिसकी बहन और एक साल का भांजा मलबे में फंसे हैं, लगातार उनके नाम पुकार रही है। वहीं, एक वीडियो में एक बचावकर्मी मलबे में फंसी बुजुर्ग महिला को यह कहकर हिम्मत देता नजर आया कि ‘छत नहीं गिरेगी, अगर गिरी भी तो मैं आपके साथ रहूंगा’। भूकंप से राजधानी कराकस का सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। एक रनवे को चालू रखा गया है, जबकि अमेरिकी विशेषज्ञ उसकी मरम्मत में जुटे हैं।

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मदद के लिए भारत ने बढ़ाया हाथ
भारत के ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भूकंप प्रभावित वेनेजुएला को भेजी गई राहत सामग्री, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और भारतीय सेना की फील्ड अस्पताल इकाई वहां पहुंच गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह सहायता राहत एवं बचाव कार्यों को मजबूती देगी। भारतीय वायुसेना के दो सी-17 ग्लोबमास्टर विमान 23 घंटे में 14,000 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर 66 टन मानवीय सहायता लेकर कराकास पहुंचे। इसमें 35 टन राहत सामग्री, दो ‘भीष्म क्यूब’ और 41 सदस्यीय बचाव दल शामिल है। वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप में अब तक 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

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