आजकल एसी लाेगों की जरुरत बनती जा रही है, लेकिन इसका बिल उनकी हालत भी बिगाड़ देता है। इसलिए वैज्ञानिक अब एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में कूलिंग का तरीका पूरी तरह बदल सकती है। वह सॉलिड-स्टेट कूलिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिसमें न कंप्रेसर की जरूरत होगी और न ही किसी गैस की। आइए जानते हैं …
सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक क्या है?
अब लगभग सभी एयर कंडीशनर रेफ्रिजरेंट गैस और कंप्रेसर से काम करते हैं, लेकिन सॉलिड-स्टेट कूलिंग सिस्टम का तरीका बिल्कुल अलग है। इस तकनीक में गैस को लिक्विड और फिर दोबारा गैस में बदलकर कूलिंग नहीं की जाती। इसके बजाय कुछ खास ठोस पदार्थों पर इलेक्ट्रिक फील्ड, मैग्नेटिक फील्ड या मैकेनिकल दबाव डाला जाता है, जिससे उनके तापमान में बदलाव आता है और ठंडक पैदा होती है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
- सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक कैलोरिक इफेक्ट्स पर काम करती है। और आसानी से कहें तो तो जब कुछ विशेष सॉलिड मटेरियल्स पर बाहरी दबाव या फील्ड लागू की जाती है, तो वे गर्म या ठंडे हो जाते हैं।
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- वैज्ञानिक इसी गुण का इस्तेमाल करके कूलिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इसमें किसी रेफ्रिजरेंट गैस की जरूरत नहीं पड़ती और पूरा सिस्टम अधिक सरल बनाया जा सकता है।
पर्यावरण के लिए क्यों है बेहतर?
- इस समय जो एसी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) गैसें हमारे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होती हैं। ये गैसें कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में धरती को कई गुना अधिक गर्म कर सकती हैं।
- अगर इनमें लीकेज हो जाए तो पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकती है क्योंकि इसमें किसी भी तरह की रेफ्रिजरेंट गैस का उपयोग नहीं होता।
क्या यह सामान्य AC से ज्यादा असरदार है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक लैब परीक्षणों में इस तकनीक का कोएफिसिएंट ऑफ परफॉर्मेंस (COP) 10 तक दर्ज किया गया है। अगर इसकी तुलना हम सामान्य एसी से करते हैं, तो इनमें आमतौर पर तीन से 5.5 के बीच सीओपी होता है। यानी मतलब साफ है कि यह तकनीक ज्यादा ऊर्जा दक्ष साबित हो सकती है। हालांकि अभी तक यह प्रदर्शन केवल नियंत्रित लैब परिस्थितियों में देखा गया है।क्या बाजार में यह एसी आ गया है?
नहीं…अभी सॉलिड-स्टेट कूलिंग सिस्टम आम लोगों तक नहीं पहुंच पाया है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती इसकी वास्तविक परिस्थितियों में कार्यक्षमता और आउटपुट को लेकर है। लैब के बाहर यह तकनीक अभी उतनी काम की साबित नहीं हो पाई है जितनी शोधकर्ताओं ने उम्मीद की थी। इसके अलावा बार-बार दबाव झेलने वाले सॉलिड मटेरियल्स की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊपन को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।शोर और गैस लीकेज की समस्या खत्म हो सकती है
सॉलिड-स्टेट तकनीक का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें पारंपरिक कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती। इसका मतलब है कि एसी का शोर काफी कम हो सकता है। साथ ही रेफ्रिजरेंट गैस न होने की वजह से गैस लीकेज जैसी समस्याएं भी पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं।हाइब्रिड सिस्टम पर भी हो रहा काम
- वैज्ञानिक केवल सॉलिड-स्टेट सिस्टम तक सीमित नहीं हैं। इसकी व्यावहारिकता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड कूलिंग सिस्टम पर भी शोध जारी है।
- इसमें सॉलिड-स्टेट कूलिंग तकनीक को सामान्य एसी के हीट एक्सचेंजर सिस्टम के साथ जोड़ा जा रहा है। आपको बता दें हीट एक्सचेंजर वह तकनीक है जो AC की गर्मी को कमरे से बाहर निकालती है।
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों तकनीकों का संयोजन भविष्य में अधिक प्रभावी और व्यावहारिक समाधान बन सकता है।
कब तक आ सकती है यह एसी बाजार में?
- फिलहाल इसे लेकर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों को भरोसा है कि आने वाले कुछ वर्षों में सॉलिड-स्टेट कूलिंग सिस्टम एयर कंडीशनिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला सकता है।
- अगर इसकी मौजूदा चुनौतियों का समाधान हो जाता है, तो भविष्य में ऐसे AC देखने को मिल सकते हैं जो कम बिजली खर्च करें, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं और बिना गैस व कंप्रेसर के भी घर को ठंडा रखें।
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