SC नाराज क्यों? मेनका गांधी की बात पर कहा- बिना सोचे बयान देना अवमानना के दायरे में

Spread the love

 

 

वारा कुत्तों के मुद्दे पर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि बिना सोचे-समझे दिए गए बयान न्यायपालिका के प्रति अवमानना के दायरे में आ सकते हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी और नगर निगम अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार जरूरी है।

मामले की सुनवाई में क्या दलीलें रखी गईं?
सुनवाई के दौरान वकीलों ने बताया कि नगर निगमों की विफलता के कारण कचरा नहीं उठता, जिससे कुत्ते इकट्ठा होते हैं। शहरीकरण के साथ कचरा बढ़ा है, लेकिन उसके प्रबंधन में कमी है। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल भावनात्मक बहस नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी सवाल है। नसबंदी और कचरा प्रबंधन जैसी मूल जिम्मेदारियां अधिकारियों की हैं।

मेनका गांधी के वकील से कोर्ट ने क्या सवाल पूछे?
मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन से न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने तीखे सवाल किए। अदालत ने पूछा कि मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता रहने के दौरान बजटीय आवंटन और ठोस पहल का जिक्र आवेदन में क्यों नहीं है। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों के प्रभाव का आकलन क्यों नहीं किया गया।

कोर्ट ने किन बातों पर कड़ी टिप्पणी की?

 

  • पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियां अवमानना की श्रेणी में आ सकती हैं।
  • अदालत ने पूछा कि क्या वकील ने अपने मुवक्किल के बयान, पॉडकास्ट और सार्वजनिक भाषा पर ध्यान दिया।
  • न्यायमूर्ति ने कहा कि बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उदारता के चलते फिलहाल अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की जा रही।
और पढ़े  दर्द भरी जंग खत्म: नम आंखों से हरीश को दी गई अंतिम विदाई, ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

अजमल कसाब का जिक्र क्यों आया?
सुनवाई के दौरान बहस में अजमल कसाब का संदर्भ आया। इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी की कि कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की थी, लेकिन यहां सार्वजनिक बयानों से ऐसा आभास बनता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि जिम्मेदार पदों पर रहे लोगों से अधिक संयम की अपेक्षा होती है।

कुत्तों को खाना खिलाने पर क्या तर्क दिए गए?
एक वकील ने दलील दी कि कुत्तों को खाना खिलाने से वे भटकते नहीं, आपस में नहीं लड़ते और बीमारियां नहीं फैलतीं। प्रति कुत्ता सालाना खर्च का भी उल्लेख किया गया। तंजानिया का उदाहरण देते हुए कहा गया कि सहानुभूति को दंडित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इन दलीलों को सुना, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर बनाए रखा।


Spread the love
  • Related Posts

    संसद बजट सत्र- लोकसभा में नक्सलवाद मुक्त भारत के प्रयासों पर चर्चा,राज्यसभा में भी अहम मुद्दे

    Spread the love

    Spread the love लोकसभा में नक्सलवाद खत्म करने की कोशिशों पर चर्चा; राज्यसभा में भी अहम मुद्दे लोकसभा में आज देश को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त करने के प्रयासों…


    Spread the love

    मन की बात- हमारे पड़ोस में भीषण युद्ध चल रहा, मन की बात में बोले PM मोदी- अफवाहों से बचें, संयम बनाए रखें

    Spread the love

    Spread the loveप्रधानमंत्री मोदी आज सुबह 11 बजे आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश और विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह…


    Spread the love