कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर पर 2022 में की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज मानहानि मामले को नासिक की एक आपराधिक अदालत ने बंद कर दिया है। यह टिप्पणी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हुई थी। मामला देवेंद्र भूटाडा, नासिक स्थित निर्भया फाउंडेशन के अध्यक्ष, ने दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गांधी ने 15 और 16 जून 2022 को हिंगोली और अकोले में रैलियों में की गई टिप्पणियां मानानि और अपमानजनक थे।
शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। इसके बाद नासिक कोर्ट ने सितंबर 2024 में गांधी को समन जारी किया। राहुल गांधी को बाद में जमानत मिल गई और उन्हें वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति दी गई, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। अदालत ने सितंबर 2024 में सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जांच भी आदेशित की थी।
पुलिस की रिपोर्ट जमा होने के बाद, शिकायतकर्ता ने केस वापस लेने की मांग की। इसके बाद, ट्रायल जज ने मामले की सुनवाई समाप्त कर दी और मानहानि प्रक्रिया को बंद कर दिया। इस फैसले के साथ ही राहुल गांधी पर इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
जानिए क्या था मामला?
यह मामला नवंबर 2022 का है, जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हिंगोली और अकोला जिलों में थे। 17 नवंबर 2022 को अकोला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने वीर सावरकर से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों को डर के कारण माफीनामा लिखा था और वे पेंशन भी लेते थे। राहुल गांधी के इस बयान के आधार पर नासिक के सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र भुताडा ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। भुताडा का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से सावरकर की छवि को नुकसान पहुँचा और करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं।






