सियासी भूचाल: 7 राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने से बदले समीकरण, भाजपा को लाभ, ‘AAP’ का बिगाड़ा गणित

म आदमी पार्टी में बगावत के बाद पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। विधानसभा चुनाव से करीब नौ महीने पहले हुए इस घटनाक्रम ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है।

 

इनमें से छह सांसद पंजाब कोटे से हैं जबकि एक दिल्ली से जुड़ी हैं। इस घटनाक्रम से भाजपा को जहां राजनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद है वहीं आप के सामने संगठन को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बगावत करने वालों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं जबकि स्वाति मालीवाल दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं। वर्तमान में पंजाब में आप की सरकार है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने रिकॉर्ड 92 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी जो उपचुनावों के बाद बढ़कर 95 हो चुकी हैं। पार्टी 2027 के चुनाव की तैयारी में जुटी थी लेकिन इस सियासी भूचाल ने उसका गणित बिगाड़ दिया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि इन सांसदों के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। इसके बावजूद यह साफ है कि आगामी चुनाव में यही नेता विरोधी खेमे में सक्रिय रहकर आप के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

भाजपा: बगावत को भुनाने की तैयारी

  • पंजाब में आप के खिलाफ बने इस नए राजनीतिक माहौल को भाजपा अवसर के रूप में देख रही है। वर्ष 2022 में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ते हुए 117 में से केवल 2 सीटें जीती थीं और उसका वोट प्रतिशत 6.6 फीसदी रहा था।
और पढ़े  एशियाई हॉकी चैंपियन ट्रॉफी: 27 अक्तूबर को जालंधर से आगाज, 1 नवंबर को होगा भारत-पाकिस्तान महामुकाबला

  • ऐसे में पार्टी के पास खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। अब आप से आए छह प्रभावशाली नेताओं के सहारे भाजपा अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश करेगी।

  • इन नेताओं की पंजाबी और बनिया वर्ग में अच्छी पकड़ मानी जाती है। भाजपा की रणनीति होगी कि इन चेहरों के प्रभाव को वोटों में बदला जाए। बगावत के बाद ये नेता आप की नीतियों और नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए पहले ही हमलावर रुख अपना चुके हैं।

आप: सहानुभूति कार्ड से नुकसान की भरपाई

  • आप नेतृत्व को इस तरह की स्थिति का अंदेशा पहले से था। यही कारण रहा कि शुक्रवार सुबह से ही पार्टी नेताओं ने भाजपा और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी थी। दोपहर तक घटनाक्रम साफ हो गया। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान इस बगावत को भाजपा के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं।

  • मान का कहना है कि पंजाबियों का प्यार पार्टी के साथ है और इस घटनाक्रम के बाद समर्थन और बढ़ेगा। पार्टी इसे बाहरी हस्तक्षेप के रूप में पेश कर सहानुभूति जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।

शिअद और कांग्रेस भी तलाशेंगी मौका

  • इस सियासी उथल-पुथल का असर केवल आप और भाजपा तक सीमित नहीं रहेगा। शिरोमणि अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी नए समीकरणों से फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। आप के पंथक एजेंडे से पहले ही शिअद को नुकसान हो रहा था। यदि आप की पकड़ कमजोर होती है तो शिअद अपने पारंपरिक वोट बैंक को वापस पाने की कोशिश करेगा।
और पढ़े  जग्गू भगवानपुरिया गैंग का शातिर अमृत डालम गिरफ्तार: ऑपरेशन ईस्टर्न रीच में मोल्दोवा से काबू, पंजाब लाई पुलिस

  • वहीं कांग्रेस भी इस मौके को भुनाने की रणनीति बना रही है। वर्ष 2022 में आप के नेता रहे सुखपाल सिंह खेहरा अब कांग्रेस में हैं और वे भी इस स्थिति का लाभ उठाकर संगठन मजबूत करने में जुट सकते हैं।

  • पंजाब की सियासत में यह घटनाक्रम निर्णायक मोड़ बनता दिख रहा है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि आप इस संकट से उबर पाती है या भाजपा और अन्य दल इस मौके को अपने पक्ष में भुनाने में सफल रहते हैं।
  • Related Posts

    एशियाई हॉकी चैंपियन ट्रॉफी: 27 अक्तूबर को जालंधर से आगाज, 1 नवंबर को होगा भारत-पाकिस्तान महामुकाबला

    हॉकी के मैदान पर पंजाब एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक पहचान दर्ज कराने जा रहा है। पहली बार पंजाब में हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन होने जा रहा है।…

    जग्गू भगवानपुरिया गैंग का शातिर अमृत डालम गिरफ्तार: ऑपरेशन ईस्टर्न रीच में मोल्दोवा से काबू, पंजाब लाई पुलिस

    पंजाब सरकार की गैंगस्टरों के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत पंजाब पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात आरोपी अमृत दालम उर्फ अमृतपाल सिंह…