उत्तराखंड- प्रदेश में पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बनेगी नीति, उत्पादकों को मिलेंगे अच्छे दाम

उत्तराखंड में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुष्प नीति बनाने जा रही है। निदेशक बागवानी मिशन महेंद्र पाल के मुताबिक इसके लिए महाराष्ट्र और हिमाचल सहित विभिन्न राज्यों की नीति का अध्ययन किया जा रहा है। अब तक राज्य की अपनी कोई पुष्प नीति नहीं है, इसके बनने से पुष्प उत्पादकों को फूलों के अच्छे दाम मिलेंगे।

 

निदेशक बागवानी मिशन के मुताबिक राज्य में लोग जरबेरा, लिलियम, गैंदा, कारनेशन, गुलाब आदि फूलों की खेती करते आ रहे हैं लेकिन राज्य की अपनी कोई पुष्प नीति न होने से पुष्प उत्पादकों को अपने फूल स्थानीय बाजार या फिर दिल्ली और चंडीगढ़ भेजने पड़ रहे हैं, पुष्प नीति में पुष्प मंडी की व्यवस्था की जाएगी। पूर्व में रुद्रपुर में पुष्प मंडी की स्थापना को मंजूरी मिली थी लेकिन मंडी चालू स्थिति में नहीं है। उद्यान विभाग के निदेशक एसएल सेमवाल बताते हैं कि पुष्प नीति बनने के बाद राज्य में फूलों की खेती क्लस्टर में की जाएगी।

वसंतोत्सव के बाद लोगों में फूलों की खेती के प्रति बढ़ी रुचि

निदेशक बागवानी मिशन महेंद्र पाल बताते हैं कि वसंतोत्सव के बाद राज्य में फूलों की खेती के प्रति लोगों में रुचि बढ़ी है। पूर्व में कोविड के दौरान बड़ी संख्या में पुष्प उत्पादकों ने इसकी खेती छोड़ दी थी लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों का इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ रहा है। वर्ष 2003-04 से राजभवन में वसंतोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

 

656 हेक्टेयर में हो रही फूलों की खेती

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उद्यान विभाग के निदेशक एसएल सेमवाल बताते हैं कि राज्य में वर्तमान में 656 हेक्टेयर में फूलों की खेती हो रही है। इसके अलावा लूज फ्लावर में 19.53 मीट्रिक टन फूलों का उत्पादन हुआ है। राज्य में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी मिशन सहित कुछ अन्य योजनाएं चल रही हैं।

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