प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर शनिवार को ताशकंद के लिए रवााना हुए। वे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत करेंगे। उनका यह दौरा दो दिन का है। इसके बाद 31 अगस्त को वह किर्गिस्तान दौरे पर रहेंगे।
अबतक कितने बार उज्बेकिस्तान गए हैं पीएम मोदी?
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों का दौरा किया था, और फिर 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में शामिल होने के लिए वहां गए थे।
गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा के बारे में एक खास मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सेक्रेटरी जॉर्ज ने कहा कि यह मुलाकात भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करने का मौका देगी।
दोनों देशों के बीच कैसा है रिश्ता?
पिछले कई वर्षों से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर बड़े पैमाने पर और फायदेमंद संबंध रहे हैं। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने 2018 में भारत की राजकीय यात्रा की थी और वे 2019 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में भी शामिल हुए थे।
उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत ने कहा,’ एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनकी पिछली द्विपक्षीय यात्रा के बाद से, व्यापार और निवेश सहित सहयोग के कई क्षेत्रों में जबरदस्त प्रगति हुई है। व्यापार में 300% की वृद्धि हुई है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। विकास सहयोग पर चर्चा होगी। साथ ही, संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक से जुड़े मामलों में सहयोग पर भी बात होगी।
उन्होंने आगे कहा ‘यह दौरा इसलिए अहम हैं क्यों कि इस बीच कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिनसे संस्कृति और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग के खास पहलुओं को ठोस रूप दिया जाएगा। उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और हमें अहम खनिजों की बहुत ज्यादा जरूरत है। मुझे लगता है कि दोनों पक्ष लंबे समय तक सप्लाई की व्यवस्था करने की संभावना पर भी चर्चा करेंगे।
भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।’
दोनों नेताओं की आखिरी बार मुलाकात कब हुई थी?
पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 के दौरान और 2024 में कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान हुई थी। इन नेताओं की पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।
गुरुवार को पीएम मोदी के दौरे पर एक खास मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सचिव जॉर्ज ने कहा, ‘यह मुलाकात भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करने का मौका देगी। साथ ही, यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी।’ ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रधानमंत्री मोदी इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।
किर्गिस्तान दौरे का क्या है कार्यक्रम?
- प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है।
- इस साल का थीम है ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’।
- मई में, एससीओ के सेक्रेटरी जनरल और कजाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री नुरलान येरमेकबायेव ने भारत और नालंदा यूनिवर्सिटी का दौरा किया।
- बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है,
- जिसमें प्रधानमंत्री मोदी अपना भाषण देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित करने की योजना है।







