पीजीआई को सफलता- एक इंजेक्शन से मिलेगी हड्डियों के दर्द से स्थायी राहत, दुनिया में पहली बार इस्तेमाल

चंडीगढ़ पीजीआई ने हड्डियों और जोड़ों के लंबे समय से चले आ रहे दर्द के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिसमें सटीक स्थान पर लगाया गया एक इंजेक्शन मरीजों को स्थायी राहत दे रहा है।

 

पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन और आर्थोपेडिक विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले तीन वर्षों में करीब 80 मरीजों पर इस तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह शोध विश्व में अपने प्रकार का पहला माना जा रहा है और इसे वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड मॉलीक्युलर इमेजिंग में प्रकाशित किया गया है। यह जानकारी न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनीश भट्टाचार्य, डॉ. राजेन्द्र और आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. विशाल ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर दी।

विभागाध्यक्ष डॉ. अनीश भट्टाचार्य ने बताया कि कमर दर्द और जोड़ों की समस्या आज आम हो चुकी है लेकिन सटीक इलाज अब तक चुनौती बना हुआ था। इस तकनीक में फ्लोरीन-18 सोडियम फ्लोराइड पेट-सीटी स्कैन के माध्यम से शरीर में दर्द के असली स्रोत की पहचान की जाती है और फिर उसी स्थान पर रोबोटिक सहायता से इंजेक्शन दिया जाता है।

शोध में मिले प्रभावी परिणाम

शोध में 85 मरीजों को शामिल किया गया जिनमें 79 की स्क्रीनिंग हुई। करीब 92.9% मरीजों में पेट-सीटी स्कैन किया गया जबकि 77% में दर्द उत्पन्न करने वाले जोड़ों की सक्रिय समस्या पाई गई। इनमें से 55 मरीजों को पेट-सीटी गाइडेड इंजेक्शन दिया गया। तीन महीने के फॉलोअप में 84% मरीजों में दर्द 50% से अधिक कम हुआ जबकि 96% मरीजों में अन्य स्वास्थ्य मानकों में सुधार देखा गया। खास बात यह रही कि किसी भी मरीज में गंभीर साइड इफेक्ट नहीं पाया गया।

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ऐसे काम करती है तकनीक

डॉ. राजेन्द्र के अनुसार पारंपरिक एक्स-रे या एमआरआई में दर्द की सटीक जगह का पता लगाना कठिन होता है जबकि पेट-सीटी स्कैन सीधे उस हिस्से की पहचान करता है जहां से दर्द उत्पन्न हो रहा है। इसके बाद रोबोटिक तकनीक की मदद से बिल्कुल सटीक स्थान पर इंजेक्शन दिया जाता है जिससे इलाज का असर अधिक प्रभावी हो जाता है। यह तकनीक कमर, घुटने, एड़ी सहित विभिन्न जोड़ों के दर्द और स्पोर्ट्स इंजरी में भी कारगर साबित हो रही है।

कम खर्च, ज्यादा राहत

इस अत्याधुनिक प्रक्रिया की लागत भी काफी कम है। इलाज पर लगभग 1500 रुपये तक का खर्च आता है और मरीजों को 1 से 2 सप्ताह के भीतर अपॉइंटमेंट मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक हर उम्र के मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है।

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