पौड़ी – हम सब तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक हमारा पर्यावरण सुरक्षित है – विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी

पौड़ी – हम सब तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक हमारा पर्यावरण सुरक्षित है – विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी

आजादी के अमृत महोत्सव पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुक्रवार से हरियाली सप्ताह महोत्सव का पूरे देश में शुभांरभ किया गया ।इसी कड़ी में कोटद्वार के नगर वन क्षेत्र पनियाली में वन विभाग ने वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया , इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया । उन्होंने कहा कि जीव सृष्टि की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि सभी लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो, क्योंकि हम तभी तक सुरक्षित हैं,पौड़ी – हम सब तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक हमारा पर्यावरण सुरक्षित है – विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी जब तक हमारा पर्यावरण सुरक्षित है। राजकीय महाविद्यालय मार्ग पनियाली वन क्षेत्र में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान पौधे रोपित करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष सहित वन विभाग के अधिकारियों एवं स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा विधिवत भूमि पूजन किया गया । इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “आजादी का अमृत महोत्सव” की भावना के तहत “हरियाली महोत्सव” का आयोजन न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के जीवन को बनाए रखने बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने में पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए किया जा रहा है। उन्होनें कहा की जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में पेड़ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों से संबंधित पहल के पूरक के रूप में इस महोत्सव का बेहद महत्व है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और इस धरती को इकोसिस्टम से जुड़ी विभिन्न सेवाएं प्रदान करने में वन, हरियाली की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से देशभर में हरियाली महोत्सव मनाया जा रहा है। कहा कि आधुनिक जीवन शैली एवं रसायनिक दवाओं आदि के प्रयोग से हमारा पेयजल, खाद्य पदार्थ एवं हमारे आस-पास का वातावरण दूषित होता है जिससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि अपने स्तर पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के साथ-साथ लोगों को वृक्षारोपण के प्रति प्रेरित एवं जागरूक किया जाए। उन्होनें कहा की वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत परंपरागत वृक्षों जैसे पीपल, बरगद व अन्य औषधीय वृक्षों को महत्व देने की आवश्यकता है। ये वृक्ष प्रकृति की सुरक्षा और संरक्षण में योगदान देते हैं।

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