बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तीन साल और पांच साल के लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की सीमा हटा दी है। शुक्रवार को बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी। इस फैसले के बाद अब किसी भी उम्र के उम्मीदवार कानून की पढ़ाई कर सकेंगे। पहले इन दोनों कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र तय की गई थी। बीसीआई की जनरल काउंसिल ने इस पाबंदी को हटाने का फैसला लिया है। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जो अधिक उम्र होने के कारण लॉ कोर्स में दाखिला नहीं ले पा रहे थे।
पहले कितनी तय थी दाखिले की उम्र?
- बीसीआई ने पहले पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 20 साल तय की थी।
- वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 22 साल रखी गई थी।
- इसके अलावा, तीन साल के एलएलबी कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 45 साल तय की गई थी।
- मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के उम्र सीमा तय करने वाले फैसले पर रोक लगा दी थी।
- इसके बाद से इस मामले पर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी।
किस नियम के तहत तय हुई थी उम्र सीमा?
बीसीआई ने साल 2016 में एक सर्कुलर जारी किया था। इसके जरिए कानूनी शिक्षा नियम, 2008 की अनुसूची तीन के नियम 28 को फिर से लागू किया गया था। इस नियम में पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 20 साल तय की गई थी। इसी फैसले को ऋषभ दुग्गल ने अदालत में चुनौती दी थी। उनका मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और मार्च 2017 में अदालत ने उम्र सीमा से जुड़े फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके बाद इस नियम को लेकर सुनवाई जारी रही।
बीसीआई ने उम्र सीमा हटाने का फैसला कब लिया?
25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से पूछा था कि क्या वह पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए अधिकतम उम्र की सीमा हटाने को तैयार है। इसके बाद शुक्रवार को बीसीआई की ओर से पेश वकील राधिका गौतम ने अदालत को बताया कि परिषद की जनरल काउंसिल ने उम्र की पाबंदी हटाने का फैसला कर लिया है। इस नए फैसले के बाद अदालत ने याचिका को बेअसर मानते हुए उसका निपटारा कर दिया। अब तीन और पांच साल के लॉ कोर्स में दाखिले के लिए पहले जैसी अधिकतम उम्र की पाबंदी नहीं रहेगी।






