खबर अपडेट- अग्निवीरों के लिए बड़ी खबर: सेवा कार्यकाल में 2 साल की बढ़ोतरी की घोषणा, सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने दी खुशखबरी

भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में सेवा दे रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि जल्द ही अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल में दो साल की बढ़ोतरी की घोषणा कर सकते हैं। इस प्रस्ताव के तहत अग्निवीरों को चार साल के निर्धारित कार्यकाल के बजाय कुल छह साल तक सेवा देने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, इस सेवा विस्तार को स्वीकार करना पूरी तरह संबंधित अग्निवीर की इच्छा पर निर्भर करेगा। यानी किसी भी अग्निवीर को अतिरिक्त दो साल तक सेवा जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
यह संभावित फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब सेना के तीनों अंग नवंबर 2026 के मध्य से अग्निपथ योजना के पहले बैच के लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से मुक्त करने की तैयारी कर रहे हैं।

18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल हो रहा पूरा

अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के लगभग 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक पूरा होने वाला है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, इन अग्निवीरों को 31 दिसंबर 2026 तक सशस्त्र बलों से बाहर होना था।

  • पहले बैच में सेना, वायुसेना और नौसेना को मिलाकर कुल लगभग 24,400 अग्निवीरों की भर्ती हुई थी।
  • इनमें से करीब 75 प्रतिशत को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद वापस जाना था।
  • पहले बैच में लगभग 19,000 अग्निवीर थल सेना, 2,850 वायुसेना और 2,550 नौसेना में शामिल हुए थे।
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क्या है अग्निपथ योजना?

केंद्र सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को युवा बनाना और उनकी युद्धक क्षमता को मजबूत करना था।

  • इस योजना के तहत तीनों सेनाओं में जवानों की भर्ती चार साल के कार्यकाल के लिए की जाती है।
  • चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है।
  • चयनित अग्निवीरों को इसके बाद 15 साल तक नियमित सेवा करने का अवसर मिलता है।
  • शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवा से मुक्त कर दिया जाता है।

 

 

तीनों सेनाओं ने अग्निवीरों के प्रदर्शन पर जताई संतुष्टि

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, थल सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों ने अलग-अलग जिम्मेदारियों में अग्निवीरों के प्रदर्शन पर संतुष्टि जताई है। इससे पहले भी अधिकारियों की ओर से संकेत दिए गए थे कि भविष्य में अग्निपथ योजना में बदलाव किया जा सकता है। खासतौर पर तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षित अग्निवीरों को अधिक संख्या में सेवा में बनाए रखने पर विचार किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में थल सेना में लगभग 2.70 लाख, वायुसेना में 27 हजार और नौसेना में करीब 21 हजार अग्निवीर कार्यरत हैं।

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