हम सब आज के डिजिटल युग में बड़ी हद तक व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप्स पर निर्भर हो चले हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए हम रोजाना संदेश भेजते हैं, कॉल करते हैं और घर-परिवार या दोस्तों के साथ जुड़े रहते हैं।
बहुत से लोग इन एप्स को सिर्फ फोन पर ही नहीं बल्कि लैपटॉप या टैबलेट में भी इस्तेमाल करते हैं। कई यूज़र तो बिना एक्टिव सिम वाले डिवाइसों में भी लॉग इन रहते हैं और आसानी से बातचीत करते हैं। पर, अब ऐसा नहीं होगा।
दरअसल, टेलिकॉम विभाग ने मैसेजिंग एप्स को लेकर एक गाइडलाइन जारी की है, जो 1 मार्च से लागू हो जाएगी। आइए आपको इसके बारे में बताते हैं, ताकि आपके साथ किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।
क्या है ये नया नियम?
केंद्र सरकार ने सूचना, संचार और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत मैसेजिंग एप्स को हर यूज़र के खाते को एक सक्रिय सिम कार्ड से सीधे जोड़ना होगा। इसका मतलब यह है कि जिस नंबर से आपका अकाउंट बना है, उस नंबर की सिम का आपके मोबाइल में होना बेहद आवश्यक है।
सरकार का मानना है कि इस तरह का सिम-बाइंडिंग सिस्टम डिजिटल पहचान को स्थिर रखेगा और अवैध उपयोग को मुश्किल बनाएगा, जिससे डिजिटल ट्रांज़ैक्शन और डेटा सुरक्षा दोनों बेहतर हो सकते हैं। ये कदम विशेष रूप से फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए उठाया गया है।








