नेशनल हेराल्ड मामले में नई प्राथमिकी,सोनिया-राहुल के अलावा सैम पित्रोदा का भी नाम

Spread the love

कांग्रेस की वरिष्ठ सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ-साथ कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत पर की गई है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपने पद का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ उठाया है।

एफआईआर में शामिल प्रमुख नाम और आरोप
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा ने तीन अक्तूबर को गांधी परिवार और सात अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज की। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 403 (बेईमानी से संपत्ति का गबन), 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

 

एफआईआर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस नेता सुमन दुबे और सैम पित्रोदा के साथ-साथ यंग इंडियन (वाईआई), डॉटैक्स मर्चेंडाइज लिमिटेड (Dotex Merchandise Ltd), डॉटैक्स प्रमोटर सुनील भंडारी और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) तथा अज्ञात अन्य को आरोपी बनाया गया है। 

 

ईडी सूत्रों के अनुसार, संघीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग करके पुलिस FIR दर्ज कराई। यह धारा केंद्रीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक पूर्ववर्ती अपराध के पंजीकरण के लिए सबूत साझा करने की अनुमति देती है, ताकि बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया जा सके और जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

यह एफआईआर ईडी के मामले को मजबूत करेगी, जिसका आरोप पत्र एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, दिल्ली के आदेश से उत्पन्न हुआ है। यह आदेश भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 26 जून, 2014 को एजेएल की संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में दायर एक निजी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दिया गया था।

और पढ़े  दिल्ली- आबादी की रफ्तार अधिक और आवास कम, 76 लाख मकानों में सिमटी 2.3 करोड़ की जनसंख्या वाली दिल्ली

एफआईआर में ईडी द्वारा 4 सितंबर को ईओडब्ल्यू को भेजे गए एक पत्र में लगाए गए आरोपों का संज्ञान लिया गया है। ईडी के इस संचार की सामग्री वही है जो केंद्रीय एजेंसी ने अपने आरोप पत्र में बताई है। ईडी ने अपने आरोप पत्र में आरोप लगाया था कि एक “आपराधिक साजिश” कांग्रेस पार्टी के पहले परिवार के नेतृत्व में, जिसमें सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस, साथ ही दुबे, पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन शामिल हैं। एजेएल की 2000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों के धोखाधड़ी वाले अधिग्रहण से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग योजना में शामिल थे।

एजेएल नेशनल हेराल्ड समाचार मंच (समाचार पत्र और वेब पोर्टल) का प्रकाशक है और इसका स्वामित्व यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के पास है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन के बहुसंख्यक शेयरधारक हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास 38 प्रतिशत शेयर हैं। कुछ साल पहले ईडी ने इस मामले में दोनों से घंटों पूछताछ भी की थी।

ईडी का दावा है कि उसकी जांच ने “निर्णायक रूप से” पाया है कि यंग इंडियन, जो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के “लाभकारी स्वामित्व” वाली एक निजी कंपनी है, ने एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को केवल 50 लाख रुपये में “अधिग्रहित” किया, जो उसके मूल्य से काफी कम था।

यह भी आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने यंग इंडियन कंपनी के माध्यम से स्वयं और अपने बेटे राहुल गांधी के व्यक्तिगत लाभ के लिए “सार्वजनिक धन को आत्म-उपयोग के लिए परिवर्तित” करके पूर्व आईएसीसी अध्यक्ष के रूप में अपनी स्थिति का “दुरुपयोग” किया। कांग्रेस पार्टी ने पहले इस जांच को “तुच्छ प्रतिशोध की रणनीति” करार दिया था और ईडी को भाजपा का “गठबंधन सहयोगी” बताया था।

और पढ़े  Train-: ट्रेन यात्रा से पहले जानें, रेलवे ने आज के लिए कैंसिल की कई ट्रेनें, देखें लिस्ट

ईडी की चार्जशीट पर 16 दिसंबर को फैसला
राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का फैसला फिर टाल दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने अब यह आदेश 16 दिसंबर को सुनाएंगे। ईडी ने इस केस में पीएमएलए के तहत सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को आरोपी बनाया है।

एजेंसी का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से जुड़ी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। पिछली सुनवाई में ईडी के वकील ने कोर्ट से कहा था कि सभी आरोपी अपना जवाब दाखिल करें लेकिन आरोपी पक्ष के कुछ वकीलों ने इसका विरोध किया। केस के बड़े रिकॉर्ड को देखने के लिए और समय मांगा।

इससे पहले कोर्ट ने सभी आरोपियों को नोटिस देकर कहा था कि संज्ञान लेने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। अदालत ने नए आपराधिक कानून बीएनएसएस की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी को इस स्तर पर भी सुना जाना फेयर ट्रायल के लिए जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि यह प्रावधान पीएमएलए से टकराता नहीं है और पारदर्शिता को बढ़ाता है। अब अदालत 16 दिसंबर को यह तय करेगी कि ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं।


Spread the love
  • Related Posts

    दिल्ली में रेलवे स्टेशन पर कत्ल: योग एक्सप्रेस में सीट के लिए पीट-पीटकर मार डाला, पंकज पर लात-घूंसों से हमला

    Spread the love

    Spread the loveदिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुए विवाद में एक यात्री की पीट-पीटकर…


    Spread the love

    खुलासा: अगवा कर बच्चों को बेचते, दिल्ली से हरिद्वार और गाजियाबाद तक 300 CCTV फुटेज से सुलझा रहस्य

    Spread the love

    Spread the love   नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (एनडीआरएस) थाना पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में बच्चों को अगवा कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस…


    Spread the love