बिलासपुर का ऐतिहासिक राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला कभी उत्तर भारत के सबसे बड़े पशुधन मेलों में शुमार था। आज बदलते समय के साथ अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है। करीब 137 वर्ष की विरासत समेटे यह मेला अब परंपरागत पशु व्यापार से हटकर सांस्कृतिक आयोजन बनकर रह गया है। आज स्थिति यह है कि बैलों की खरीद फरोख्त तो दूर पूजन के लिए भी बाहर से मंगवाने पड़ते हैं।









