घोषणा- माइक्रोसॉफ्ट ने किया चाइनीज टेक्निकल सपोर्ट बंद, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाया कदम

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माइक्रोसॉफ्ट ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत अब अमेरिकी रक्षा ग्राहकों को अपनी क्लाउड सेवाओं के लिए चीन-स्थित इंजीनियरिंग टीमों से तकनीकी सहायता नहीं मिलेगी। यह फैसला उस समय आया है जब ProPublica की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (DoD) माइक्रोसॉफ्ट के चीन में स्थित इंजीनियरों पर निर्भर था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई गई।

माइक्रोसॉफ्ट के चीफ कम्युनिकेशन ऑफिसर फ्रैंक शॉ ने शुक्रवार को X (पूर्व ट्विटर) पर एक बयान जारी करते हुए कहा, “इस सप्ताह सामने आई चिंताओं के बाद, माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिकी सरकारी ग्राहकों के लिए अपनी तकनीकी सहायता प्रणाली में बदलाव किए हैं। अब चीन में स्थित कोई भी इंजीनियर डिफेंस क्लाउड या उससे संबंधित सेवाओं के लिए तकनीकी सहायता नहीं देगा।”

यह नीति बदलाव सीधे तौर पर माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure को प्रभावित करता है, जो कंपनी की वैश्विक आय का 25% से अधिक हिस्सा बनाता है। Azure अब गूगल क्लाउड से बड़ा है, हालांकि अमेजन वेब सर्विसेज से अभी भी पीछे है। कंपनी की ताज़ा तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, उसके $70 बिलियन डॉलर के कुल राजस्व का आधे से अधिक हिस्सा अमेरिका से आया है, जिसमें सरकारी अनुबंधों की बड़ी भूमिका है। 

यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट की डिफेंस क्लाउड सेवाएं विवादों में आई हैं। 2019 में कंपनी को अमेरिकी पेंटागन से $10 अरब डॉलर का क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट मिला था, जिसे 2021 में कानूनी विवादों के चलते रद्द कर दिया गया, लेकिन 2022 में माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और ओरैकल के साथ $9 अरब डॉलर की मल्टी-वेंडर डिफेंस डील में फिर शामिल हुई।

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ProPublica की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुपरवाइज़रों की निगरानी में काम कर रहे चीन के Azure इंजीनियरों को “डिजिटल एस्कॉर्ट्स” नामक सिस्टम के तहत हैंडल किया जा रहा था। हैरानी की बात यह रही कि इन अमेरिकी सुपरवाइजरों के पास उन इंजीनियरों से कम तकनीकी ज्ञान था, जिन्हें वे मैनेज कर रहे थे। यह मॉडल अमेरिकी रक्षा ढांचे को विदेशी हस्तक्षेप के लिए संवेदनशील बना सकता था।


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