महिला आरक्षण- संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद आगे की राह क्या? जानिए …

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लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने और इसके जरिए महिला आरक्षण को 33 फीसदी करने के लिए लाया गया संविधान संशोधन (131वां) विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन विधेयक के पक्ष में सिर्फ 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। ऐसे में सवाल उठता है कि अब आगे की राह क्या होगी?

 

परिसीमन अब जनगणना के बाद

    • सरकार यदि कोई बदलाव नहीं करती है, तो परिसीमन अब 2026 की जनगणना के बाद होगा। 2002 में लागू संविधान के 84वें संशोधन अधिनियम-2001 ने 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा एवं विधानसभाओं में सीटों की कुल संख्या पर लगी रोक 2026 तक बढ़ाई थी।
    • अब अगली जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन का इंतजार करना होगा। यानी 2029 में महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा।
    • 2026 के बाद, सीटों की संख्या बढ़ाने पर लगी रोक सांविधानिक रूप से हट जाएगी। सरकार जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कर पाएगी। इसके लिए जो कानून बनेगा, उसे पारित करने के लिए सिर्फ सामान्य बहुमत जरूरी होगा।

अब राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकेगा विधेयक

  • संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। उसका दोनों सदनों में अलग-अलग दो तिहाई बहुमत से पारित होना अनिवार्य है।
  • लोकसभा में विधेयक गिर जाने पर वह वहीं खत्म हो जाता है। उसे फिर राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता।
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पीएम मोदी ने की थी अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतदान से पहले सांसदों से अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की अपील की थी। उन्होंने कहा, समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को निर्णय लेने में उनका उचित स्थान मिले। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ऐसा कुछ भी न करें, जिससे पूरे भारत की महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचे। करोड़ों महिलाएं हमें देख रही हैं। हमारे इरादों और फैसलों को। मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधनों के समर्थन का अनुरोध करता हूं। मैं सभी सांसदों से अपील करना चाहता हूं, कृपया अपनी अंतरात्मा से विचार करें, अपने परिवारों की महिलाओं को याद रखें। हमारी नारी शक्ति को नए अवसरों से वंचित न करें।’


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