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जमरानी बांध परियोजना को लेकर वन्यजीव प्रेमियों की चिंता अब खत्म होने वाली है। परियोजना के अधिकारियों के मुताबिक, बांध के साथ-साथ जंगल के जानवरों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उप महाप्रबंधक बीबी पांडेय ने बताया कि जमरानी बांध क्षेत्र टाइगर कॉरिडोर का अहम हिस्सा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की गाइडलाइन के तहत परियोजना इकाई ने 10 साल तक सैटेलाइट आधारित निगरानी का प्लान तैयार किया है।उन्होंने बताया कि परियोजना का उद्देश्य है कि गौला नदी पर बन रहे इस बांध से बाघों का नंधौर से दुधवा और नेपाल तक का मूवमेंट बिल्कुल प्रभावित न हो। इसके लिए 352 हेक्टेयर में से प्रभावित 10 प्रतिशत कॉरिडोर को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है।
पांडेय ने बताया कि 22 करोड़ रुपये से अधिक के वन्यजीव संरक्षण बजट में कैमरा ट्रैप, जीपीएस कॉलरिंग और गांवों में बायो फेंसिंग का काम शामिल है। हर छह महीने में सैटेलाइट डेटा की रिपोर्ट एनटीसीए को भेजी जाएगी।