नोएडा एयरपोर्ट बनने में लगे दो दशक- 2001 में राजनाथ सिंह ने दिया था प्रस्ताव, अब 25 वर्ष बाद पूरा हुआ सपना

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जेवर में करीब 25 साल बाद एयरपोर्ट का सपना पूरा हो रहा है। वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) रूप में एयरपोर्ट प्रस्तावित किया गया था। तत्कालीन केंद्र की अटल बिहारी सरकार ने अप्रैल 2003 में एयरपोर्ट की स्थापना के लिए तकनीकी-व्यवहार्यता रिपोर्ट को स्वीकार किया था।

हालांकि बाद अगले 16 वर्ष तक कई बार हवाई अड्डा कभी राजस्थान के भिवाड़ी और कभी हरियाणा और कभी यूपी में फिरोजाबाद के लिए भी तत्कालीन सरकारों ने ले जाने का प्रयास किया लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और वर्ष 2017 में प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद इस सपने को सच करने के लिए मुख्य कार्य हुआ, जो आज पूरा होने जा रहा है।

नोएडा एयरपोर्ट से दूरी
आईजीआई एयरपोर्ट से 72 किमी
बुलंदशहर से 36 किमी
नोएडा से 60 किमी
फरीदाबाद के सेक्टर-65 से 31 किमी (ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद)
गाजियाबाद से 30 किमी (ईस्टर्न पेरिफेरल से यमुना एक्सप्रेसवे जुड़ने के बाद)
नोट: यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा होने के चलते मथुरा, अलीगढ़, आगरा और वृंदावन से पर्यटक करीब एक से डेढ़ घंटे में एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे।

इस प्रकार विकसित होगा एयरपोर्ट
प्रथम चरण – 1334 हेक्टेयर
दूसरा चरण- 1365 हेक्टेयर
तीसरा व चौधा- 2054 हेक्टेयर
5 रनवे तैयार होंगे चौथे चरण तक

वर्ष 2003 में केंद्र सरकार की ओर से स्वीकारी गई रिपोर्ट में वर्ष 2007-2008 तक 5000 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि यूपीए शासन के दौरान परियोजना रोक दी गई। इसके पीछे तर्क दिया गया कि परियोजना स्थल दिल्ली में एक मौजूदा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 72 किलोमीटर के अंदर है।

आईजीआई के संचालक जीएमआर ग्रुप ने दिल्ली के मौजूदा विमानक्षेत्र के 150 किलोमीटर के अंदर एक और अंतरराष्ट्रीय विमान क्षेत्र की योजना का विरोध किया था। दावा था कि यह यातायात और आईजीआई के राजस्व को प्रभावित करेगा। 

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एयरपोर्ट बनने में लगे दो दशक
2001 : तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने जेवर में एयरपोर्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा
2008: सात साल के बाद दोबारा से तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा।
2012: अखिलेश सरकार में प्रोजेक्ट स्थगित हुआ और फिरोजाबाद के टूंडला में एयरपोर्ट चनने की तैयारी शुरू हुई।
2014: अखिलेश सरकार ने प्रस्ताव संशोधित कर आगरा के एत्मादपुर में एयरपोर्ट बनाने की मांग रखी।
2017: प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर से जेवर में एयरपोर्ट बनाने को घोषणा की।

इस प्रकार होगा विकास
कार्य  — प्रथम चरण — चौथा चरण
यात्री क्षमता — 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष — 7.2 करोड़ प्रति वर्ष
उड़ानें  — एक लाख प्रतिवर्ष   —-  पांच लाख प्रतिवर्ष
रनवे —  उत्तर रनवे 3900 मीटर —-  दक्षिण रनवे 4150 मीटर
टर्मिनल — एक लाख वर्गमीटर  —-  पांच लाख वर्गमीटर
एयरक्राफ्ट स्टैंड — 28  —-  186

योगी सरकार आने के बाद बदला माहौल वर्ष 2017 में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो जेवर में दोबारा से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की कवायद शुरू हो गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मई 2018 में उत्तर प्रदेश शासन को विमानक्षेत्र के निर्माण के लिए सैद्धांतिक सहमति दी। इसके बाद 29 नवंबर 2019 को स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को टेंडर मिला।

एयरपोर्ट  एयरपोर्ट बनने में लगे दो दशक
2018: केंद्र सरकार ने जेवर में एयरपोर्ट को चनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी।
2019: ज्यूरिख इंटरनेशनल की 40 साल के लिए एयरपोर्ट को बनाने और संचालन के लिए अनुबंध लाइसेंस मिला।
2020: जेबर के छह गांवों में 1,239 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हुआ।
2021: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास किया।
2025 साल के अंत में एयरपोर्ट का काम पूरा कर डीजीसीए के एयरोड्रम लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू हुई।
2026: छह मार्च को डीजीसीए ने जारी किया एयरीडम लाइसेंस।

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यीडा को बनाया गया
एजेंसी : यमुना प्राधिकरण (गौडा) शासन की ओर से इस विमान क्षेत्र की कार्यान्वयन एजेंसी है। विमान क्षेत्र को सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल (पीपीपी) के अंतर्गत विकसित किया। इसके बनने से प्रदेश में कुल पांच अंतरर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे हो गए हैं।

मील का पत्थर साबित होगा
देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जेवर में विकसित हो रहा है। उद्घाटन होते ही नोएडा दुनिया के मानचित्र पर एक बार फिर से उभरेगा। यह हवाई अड्डा न केवल नोएडा बल्कि उत्तर प्रदेश व देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा। डॉ. महेश शर्मा, सांसद

ऐतिहासिक होगा आयोजन
आयोजन को भव्य ए उत्सव बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। बृहस्पतिवार को जेवर में आसपास के अनेक ग्रामों के नागरिकों, किसानों एवं ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। धीरेंद्र सिंह, विधायक जेवर

पहले होना चाहिए था उद्घाटन
उद्घाटन पहले हो 6 जाना चाहिए था। प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मायावती बहुत पहले इसे शुरू कराना चाहती थी। लेकिन केंद्र की तत्कालीन सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। अब यह 15 साल पीछे है। लखमी सिंह, जिलाध्यक्ष, बसपा


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