पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने गुरुवार को सुबह 2:50 बजे मध्य ईरान के हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया। आईआरजीसी के अनुसार, विमान के क्रैश होने की बहुत ज्यादा संभावना है। दूसरी तरफ, सीएनएन रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरानी मिसाइलों के हमले के बाद एक एफ-35 विमान को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
क्या बोला अमेरिकी सेंट्रल कमांड
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने पुष्टि की कि विमान ईरान के ऊपर एक मिशन पर था। उन्होंने बताया कि विमान सुरक्षित उतर गया है और पायलट की हालत स्थिर है। फिलहाल इस घटना की जांच चल रही है। बतादें कि, एफ-35 दुनिया के सबसे महंगे विमानों में से एक है और इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। अगर ईरान का यह दावा पूरी तरह सच साबित होता है, तो यह इस युद्ध की सबसे बड़ी सैन्य उपलब्धि होगी। ब्लूमबर्ग और सीएनएन रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है।
ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को बड़े नुकसान
- पहली बार किसी देश ने एफ-35 लाइटनिंग 2 विमान पर हमला किया।
- युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका के 16 सैन्य विमान नष्ट।
- करोड़ों की लागत वाले ड्रोन, रडार और रिफ्यूलिंग टैंकर भी हुए हैं तबाह।
- युद्ध की शुरुआत से अब तक 10 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी नष्ट।
- ईरान ने यह भी दावा किया है उसने युद्ध की शुरुआत से अब तक यूएस-इस्राइल के 125 से ज्यादा ड्रोन भी ढेर किए है।
अमेरिकी को हुए कई बड़े नुकसान
इस युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को कुछ और नुकसान भी उठाने पड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने गलती से अमेरिका के तीन एफ-15 ईगल विमानों को मार गिराया। हालांकि, इन विमानों के सभी छह क्रू सदस्य सुरक्षित बच गए। इसके अलावा, पिछले हफ्ते इराक में अमेरिका का एक केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान क्रैश हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार सभी छह सदस्यों की मौत हो गई। अमेरिकी सेना ने कहा है कि यह क्रैश किसी दुश्मन के हमले की वजह से नहीं हुआ था।
इन तमाम घटनाओं के बावजूद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिका निर्णायक रूप से जीत रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इस बीच सीएनएन की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया था गया कि, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ओकिनावा से मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप को तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को हाल ही में सिंगापुर के पास देखा गया था।







