मानवाधिकार परिषद में ईरान के साथ खड़े हुए भारत-पाकिस्तान और चीन; किया ऐसा काम..

Spread the love

 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 39वें विशेष सत्र में शुक्रवार को भारत ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका को चौंका दिया। दरअसल, इस सत्र में ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से एक निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। लेकिन भारत ने खुले तौर पर इसमें ईरान का साथ दिया और इस प्रस्ताव के विरोध में वोट किया।

 

 

इस प्रस्ताव में क्या था?
आइए सबसे पहले जानते हैं कि यह प्रस्ताव क्या था और इसका मकसद क्या था। पश्चिमी देशों की ओर से प्रस्ताव संख्या ए/एचआरसी/एस/एल.1 पेश किया गया, जिस पर मतदान किया गया। इस प्रस्ताव का मकसद ‘इस्लामी गणराज्य ईरान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति’ की निंदा करना था। खासतौर पर ईरान में पिछले महीने भड़के विरोध प्रदर्शनों और हजारों लोगों की मौतों के मद्देनजर यह प्रस्ताव लाया गया था। पश्चिमी देश चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र ईरान पर सख्त रुख अपनाए। लेकिन वैश्विक दक्षिण के कई अहम देशों ने इसे खारिज किया और पश्चिमी एजेंडा करार दिया।

 

प्रस्ताव के पक्ष-विपक्ष में कितने वोट पड़े?
प्रस्ताव में तेहरान से मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने की मांग की गई थी। इसे 47 सदस्यीय परिषद में पेश किया गया। परिषद के 25 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया। जबकि 14 सदस्य देश इसमें तटस्थ रहे। वहीं सात देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया, जिनमें भारत और चीन भी शामिल थे। मतदान के दौरान असेंबली हॉल में माहौल तनावपूर्ण दिखा। प्रस्ताव को लेकर किए गए मतदान के नतीजे स्क्रीन पर दिखाए गए, जिसमें दुनिया दो धड़ों में बंटती नजर आई।

एक सुर में ईरान के साथ खड़े हुए भारत, पाकिस्तान और चीन
आम तौर पर भारत इस तरह के विवादित प्रस्तावों पर सीधे ‘हां’ या ‘ना’ वोट देने की बजाय ‘तटस्थ’ रहने की कूटनीति अपनाता रहा है। लेकिन इस बार उसने तटस्थ रहने के बजाय सीधे ‘ना’ वोट किया। जिन देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया उनमें भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक, वियतनाम, इंडोनेशिया और क्यूबा शामिल थे। यह दुर्लभ मौका था, जब किसी अंतरराष्ट्रीय पर भारत और उसके पड़ोसी देश चीन व पाकिस्तान ने एक ही पक्ष की तरफ वोट किया।

और पढ़े  एपस्टीन मामला- एपस्टीन केस में पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की गवाही, कहा- अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी

 

किन पश्चिमी देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन?
इस प्रस्ताव के समर्थन में 25 देशों ने वोट किया। इनमें प्रमुख रूप फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, कोस्टा रिका, चिली जैसे देश शामिल थे।

वोटिंग के दौरान तटस्थ रहे ये देश
वहीं, वैश्विक दक्षिण के कई देशों ने मतदान से दूरी बनाई। कुल 14 सदस्यों देशों ने मतदान से परहेज किया। यानी इन देशों ने वोटिंग के दौरान तटस्थ रहने का विकल्प चुना। इनमें ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, कतर, कुवैत, मलयेशिया और बांग्लादेश शामिल हैं।

भारत ने क्यों प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया?
पारंपरिक रूप से विवादित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तटस्थ रहने की नीति अपनाता रहा है। लेकिन इस बार उसने सीधे विपक्ष में वोट दिया है। इसके भारत की विदेश नीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव है। यूएनएचआरसी में अपने वोट से भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम के किसी भी दबाव में नहीं आएगा। ईरान के साथ भी भारत के मजबूत संबंध रहे हैं। अमेरिकी की ओर से सख्त प्रतिबंध लगाए जाने से ईरान भारत की उर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता रहा। इसके अलावा, रणनीति रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के लिए ईरान भारत के अहम है।

विशेषज्ञों की मानें तो भारत ने सीधे विरोध में वोट डालकर यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि वह दोहरा मापदंडों के खिलाफ खड़ा है और मानवाधिकार उल्लंघन के नाम पर किसी देश के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, 25 वोट होने के कारण यह प्रस्ताव परिषद में पारित हो गया।

और पढ़े  पश्चिम एशिया में तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी का शांति संदेश: पहले यूएई के राष्ट्रपति, फिर इस्राइली पीएम से की बातचीत

Spread the love
  • Related Posts

    जारी है साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण काल में क्या करें और राशियों पर कैसा होगा असर

    Spread the love

    Spread the love     साल का पहला चंद्र ग्रहण जारी है। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से हो चुका है। यह ग्रहण शाम 6 बजकर 47…


    Spread the love

    नितिन नवीन समेत BJP के नौ राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी देखें

    Spread the love

    Spread the loveभाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके बाद उनकी आवाज संसद से पूरे देश में सुनी जाएगी।…


    Spread the love