Hostel: जेएनयू में विवाहित शोधार्थियों के लिए रहना हुआ महंगा, सुबनसिर हॉस्टल के नियम और शुल्क बदले

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने विवाहित शोधार्थियों के लिए बने महानदी एक्सटेंशन (सुबनसिर हॉस्टल) से संबंधित आवंटन नियमों और हॉस्टल शुल्क में बदलाव किए हैं। यह फैसला गठित समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। विश्वविद्यालय के डीन छात्र कार्यालय ने अधिसूचना जारी कर दी है।

इसके अनुसार विश्वविद्यालय हॉस्टल मैनुअल से एमफिल कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रावधान हटा दिए हैं। इसकी वजह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2022 के पीएचडी नियमों के तहत एमफिल कार्यक्रम समाप्त कर दिया है। हॉस्टल मैनुअल से जीरो सेमेस्टर से संबंधित संदर्भ भी हटाए गए हैं। यह प्रावधान 2018 के बाद लागू नई पीएचडी अध्यादेश में शामिल न होने की वजह से किया है।

चार साल तक रह सकेंगे हॉस्टल में

नए नियमों के अनुसार भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणी के छात्रों को पीएचडी में प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही हॉस्टल में रहने की अनुमति होगी। शोध जमा करने के लिए कोई बकाया नहीं और आवेदन करते समय भी हॉस्टल खाली करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि के बाद किसी भी परिस्थिति में हॉस्टल प्रवास की अनुमति नहीं दी जाएगी।

 

हॉस्टल आवंटन में इन्हें मिलेगी प्राथमिकता

अधिसूचना में बताया गया है कि हॉस्टल आवंटन में गर्भवती छात्राओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर भी अब वही नियम लागू होंगे जो भारतीय छात्रों के लिए निर्धारित हैं। विश्वविद्यालय ने हॉस्टल शुल्क में भी संशोधन किया है। नए नियमों के तहत 30 हजार रुपये रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होगा। जबकि एस्टेब्लिशमेंट शुल्क और कमरे का किराया पांच हजार रुपये हर माह तय किया है।

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एक जून से हॉस्टल आवेदन की प्रक्रिया होगी शुरू

बिजली और पानी का शुल्क खपत के आधार पर लिया जाएगा। साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट, एस्टेब्लिशमेंट शुल्क और किराये में प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा सभी आवंटित छात्रों को प्रवेश से पहले निर्धारित्त प्रारूप में शपथ पत्र देना, स्वयं और जीवनसाथी की नौकरी एवं आय से संबंधित घोषणा भी देनी होगी। वहीं विवाहित पीएचडी शोधार्थियों के हॉस्टल आवंटन को लेकर आवेदन फॉर्म एक जून से जमा करवा सकेंगे।

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