बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अफसरों पर विवादित बयान के बाद सुक्खू सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए। वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैं वैसा सम्मान नहीं कर सकता जैसा कि एनएचएआई के अफसरों का किया। बता दें कि विक्रमादित्य के बयान के बाद सबसे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की प्रतिक्रिया आई थी। अब अनिरुद्ध सिंह ने टिप्पणी तो विक्रमादित्य ने उन्हें उनके पुराने विवाद पर घेरने का प्रयास किया। अब पूरे मामले में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य चारों तरफ घिर गए हैं। आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी विरोध में उतर आए हैं।
मंत्रियों को अफसरों से काम करवाना आना चाहिए: अनिरुद्ध
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध ने बुधवार को विक्रमादित्य के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयानों से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। हिमाचल प्रदेश में ज्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों से हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मंत्रियों को अफसरों से काम करवाना आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी गलतियां छिपाने के लिए अधिकारियों पर गाज गिराना सही नहीं है। काम करवाने का भी तरीका होना चाहिए। अपनी गलती किसी और पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ के तौर पर काम करते हैं। वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। साल 2016 के बाद तो प्रदेश में नए आईएएस अधिकारी भी नहीं आए हैं। यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनते हैं। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी बाहरी राज्यों में काम कर रहे हैं।
मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा कि एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ: विक्रमादित्य
मंत्री अनिरुद्ध सिंह की टिप्पणी के बाद देर शाम लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य ने कहा कि जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह तजुर्बे, रुतबे और उम्र में उनसे बड़े हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं और साथ ही अधिकारियों का भी। उन्होंने नाम लिए बगैर कहा कि, मैं वैसा मान-सम्मान नहीं कर सकता, जैसा कि एनएचएआई के अधिकारियों का हुआ था। विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर कहा- मैं जो भी कहता हूं, वह साफ शब्दों में कहता हूं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए अगर मुझे किसी के सामने बुरा भी बनना पड़े तो मैं तैयार हूं। उप मुख्यमंत्री ने जो बात कही, उन्होंने तो उसे सेकंड किया है। विक्रमादित्य सिंह ने गुरुवार को एक और पोस्ट की। इसमें उन्होंने लिखा, हमारे के लिए हिमाचल के हित सर्वश्रेष्ठ थे, है और सदैव रहेंगे। कोई भी समझाैता प्रदेश के हितों के साथ होने नहीं देंगे।’









