यातायात व्यवस्था सुधारने और सुगम सफर के लिए से चौड़े किए हाईवे पर फर्राटा भरती गाड़ियां लोगों के जीवन के पहिये की गति को हमेशा के लिए थाम रही हैं। शहर के अत्यधिक व्यस्त रहने वाले हाईवे रामपुर रोड और बरेली रोड आए दिन खून से लाल हो रहे हैं। हाईवे पर तेज रफ्तार लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है। एक के बाद एक हादसे होने के बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग नींद में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले हाईवे पर रफ्तार को नियंत्रित नहीं किया जाएगा तब तक जानलेवा हादसों पर ब्रेक लगाना संभव नहीं है। पिछले दो साल में रामपुर रोड और बरेली रोड पर 30 से अधिक हादसे हुए हैं। अलग-अलग स्थानों पर हुए इन हादसों में 25 लोग जान गंवा चुके हैं जबकि 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
11 जुलाई की घटना से फिर उठे सवाल
11 जुलाई को बरेली रोड में एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से चार युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसा वाहन के तेज रफ्तार में होने के कारण हुआ था। इस हादसे ने साबित कर दिया है कि अगर वक्त रहते वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो लोग इसी तरह अपनों को खोते रहेंगे।
किस काम का परिवहन विभाग, किस काम की पुलिस
अक्सर परिवहन विभाग और पुलिस के अधिकारी बड़े हादसे के बाद ही जागते हैं। हादसे के अगले दो-तीन दिन तक चेकिंग अभियान चलाते हुए चालान काटे जाते हैं। इसके बाद व्यवस्था फिर बेपटरी हो जाती है। अफसरों की उदासीनता इसी से पता चलती है कि हादसों के लिहाज से संवेदनशील आबादी वाले क्षेत्रों में स्थायी रूप से स्पीड रडार, कैमरे, इंटरसेप्टर वाहनों की तैनाती और सुरक्षित साइन बोर्ड लगाने के कोई प्रयास नहीं हुए। इसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
दोनों सड़कों पर तेज रफ्तार वाले जोन
-रामपुर रोड पर पंचायत घर से लेकर एस मोड़ बेलबाबा तक निर्धारित स्पीड 80 किमी प्रतिघंटा है लेकिन यहां गाड़ियां सौ या फिर उससे अधिक रफ्तार से दौड़ती रहती हैं। बेलबाबा से पंचायत घर तक वाहनों की रफ्तार हाईवे के पास रहने वाली आबादी के लिए बड़ा खतरा है। करीब चार किमी के इस क्षेत्र में 10 से अधिक गांव, 20 से अधिक कॉलोनियां हैं जहां 18 हजार से अधिक की आबादी निवास करती है। इस हाईवे किनारे मंदिर, गुरुद्वारा, राधा स्वामी सत्संग, स्कूल हाउसिंग सोसायटी बनी हैं।
-तीनपानी से लालकुआं तक 12 किमी का हाईवे आबादी क्षेत्र से लगा है। हाईवे से लगे गोरापड़ाव, मोतीनगर, मोटाहल्दू, बेरीपड़ाव, हल्दूचौड़ और गुमटी में 40 से अधिक कॉलोनियां और 10 गांव हैं। यहां 40 हजार की आबादी रोजाना फर्राटा भरते वाहनों के बीच आवाजाही करती है। हाईवे पर मोटाहल्दू में औद्योगिक आस्थान, 10 स्कूल-कॉलेज, इंडेन गैस प्लांट, आईटीबीपी परिसर, वन निगम डिपो के साथ ही पांच मंदिर हैं।
नेशनल हाईवे के डिजाइन के अनुसार ही वाहनों की स्पीड तय की जाती है। संबंधित विभाग को हाईवे पर सीसीटीसी कैमरे के जरिये नियम तोड़ने वालों पर सख्ती करनी चाहिए अन्यथा हादसों पर रोक लगाना मुश्किल होगा। -केके जैन, मुख्य अभियंता लोनिवि (सेवानिवृत्त)
हाईवे पर बढ़ते हादसे गंभीर हैं। रोड सेफ्टी का एक्सपर्ट से ऑडिट कराकर हादसे के संभावित क्षेत्रों में सुधार किया जा सकता है। यदि ज्योमेट्री में सुधार की जरूरत तो उस पर भी काम किया जा सकता है। चालकों की गलती से हादसे हो रहे हैं तो उन्हें सतर्क करने के लिए सुरक्षा संबंधी संकेतक लगाए जा सकते हैं। -बीसी बिनवाल, मुख्य अभियंता लोनिवि (सेवानिवृत्त)
हल्द्वानी और इसके आसपास की सड़कों पर हो रहे हादसे चिंता का कारण हैं। लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए ही जल्द रोड सेफ्टी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में विशेषज्ञों से रायशुमारी कर हादसों पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय कराए जाएंगे। -ललित मोहन रयाल, जिलाधिकारी नैनीताल
तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और आरटीओ को कार्रवाई करनी है। हाईवे पर जहां लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है वहां के लिए सेंट्रल लाइन बनाने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। -अचल जिंदल, प्रोजेक्ट, डायरेक्टर एनएचएआई
ओवरस्पीड, बगैर सीट बेल्ट और हेलमेट के वाहन चलाने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग की टीमें लगातार चेकिंग अभियान चला रही हैं। वाहन चालकों को हाईवे पर तेज गति से वाहन न चलाने के लिए समय-समय पर जागरूक भी किया जा रहा है।अरविंद पांडे, आरटीओ हल्द्वानी
बरेली रोड, रामपुर रोड पर हाईवे से लगे गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। तेज रफ्तार चौपहिया वाहनों पर अंकुश न लगने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। बरेली रोड पर सर्विस लेन सुविधाजनक न बनाने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -गोपाल अधिकारी, अध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन, नैनीताल






