स्वास्थ्य चेतावनी: कोविड के समय हुई गलती अब पड़ रही भारी, दुनियाभर में इस गंभीर संक्रमण के मामलों ने बढ़ा दी चिंता

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दिसंबर 2019 के आखिरी के महीनों से दुनियाभर में शुरू हुई कोरोना महामारी ने कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कीं। कोविड के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ा, लिहाजा कई बीमारियों से बचाव के लिए किया जाने वाला टीकाकरण भी प्रभावित हुआ। दुनियाभर में अब इन गलतियों के दुष्प्रभाव दिखने शुरू हो गए हैं।

पिछले छह महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि यूएस-यूके सहित कई देशों में मीज्लस (खसरा) के मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। हाल के दिनों में भारत में भी इस रोग के मामले जिस तरह से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं उसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका फिलहाल इससे सबसे प्रभावित माना जा रहा है। 27 मार्च तक संयुक्त राज्य अमेरिका में खसरे के कुल 483 पुष्ट मामले रिपोर्ट किए गए, यहां आधिकारिक तौर पर दो लोगों की मौत भी हुई हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने देशभर में इस बढ़ते खतरे को लेकर सावधानी बरतने और बचाव करते रहने की सलाह दी है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यात्राओं को लेकर सभी लोगों को अलर्ट किया है।

अमेरिका में आने वाले यात्रियों को किया गया अलर्ट

स्वास्थ्य एजेंसी ने यात्रियों से आग्रह किया है कि अमेरिका जाने से पहले खसरे का टीकाकरण जरूर करा लें। इसके अलावा अमेरिका में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सलाह दी गई है कि खसरे के प्रकोप को रोकने के लिए वैक्सीन का स्टॉक बनाए रखें। सीडीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल अमेरिका में खसरे के प्रकोप ने 20 से अधिक स्टेट्स को प्रभावित किया है।

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खसरा वैसे तो किसी भी आयु के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में जटिलताएं अधिक देखी जाती हैं। जिन लोगों को टीका नहीं लगा है या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, उनमें खसरे के कारण गंभीर समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

2023 से बढ़ रहे हैं खसरा के मामले

साल 2023 से ही खसरे का प्रकोप दुनियाभर में बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और सी.डी.सी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 57 देशों में से एक है, जहां 2023 में खसरे के बड़े पैमाने पर प्रकोप देखे गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर संक्रमण की घटनाओं में 20% की वृद्धि हुई है, 2023 में खसरे के 10.3 मिलियन मामले दर्ज किए गए।

भारत, दशकों से इस गंभीर बीमार से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक रहा है, हालांकि टीकाकरण को बढ़ावा देकर इस रोग के जोखिमों को पिछले वर्षों में काफी कम कर दिया गया था।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 से 2021 के बीच भारत में खसरे के मामलों में 62% की गिरावट आई, इस दौरान प्रति दस लाख जनसंख्या पर 10.4 से घटकर 4 मामले रह गए थे। हालांकि महामारी के दौरान राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान पर भी असर देखा गया जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे खसरे के टीके से चूक गए। लिहाजा देश के कई हिस्सों से पिछले दिनों बच्चों में खसरा के मामले बढते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं।

कोरोना के दौरान बड़ी संख्या में टीकाकरण से वंचित रह गए थे बच्चे

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डब्ल्यूएचओ और यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारत में अनुमानित 11 लाख बच्चे खसरे के टीके की अपनी महत्वपूर्ण पहली खुराक लेने से चूक गए। यह भारत को उन 10 देशों में शामिल करता है जहां ऐसे बच्चों की संख्या सबसे अधिक है जिन्हें पहला टीका नहीं मिला।

खसरा, बच्चों में होने वाला संक्रामक रोग है, गंभीर स्थितियों में इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना जरूरी है।

खसरे के लक्षणों पर दें ध्यान

डब्ल्यूएचओ ने एक पोस्ट में खसरे के बढ़ते मामलों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट किया है। खसरा जानलेवा हो सकता है। ऐसे में इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना और डॉक्टरी सलाह लेना जरूरी है।

चेहरे पर होने वाले दाने जो पूरे शरीर में फैल जाते हैं ये खसरा का लक्षण हो सकता है। इसके साथ बुखार, नाक बहने, खांसी, आंखों में लालिमा या पानी आने और गालों के अंदर छोटे सफेद धब्बे  दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण:  “न्यू भारत”  की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को “न्यू भारत” के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। “न्यू भारत” लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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