इंजीनियर की मौत- घटनास्थल से 800 मीटर दूर था थाना, 200 मी. के दायरे की फोन लोकशन, फिर भी तड़प-तड़पकर मर गया कमल

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ह सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, यह सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है। एक ऐसी व्यवस्था का सच, जिसे शायद न जुड़वा भाई के असमय बिछड़ने का दर्द समझ आता है और न ही उस पिता मां की पीड़ा, जिनके कंधों पर जवान बेटे का शव आ गया। जनकपुरी के खुले गड्ढे में पड़ी बाइक और युवक का निर्जीव शरीर यह सवाल पूछ रहा है कि क्या लापरवाही अब हादसा नहीं, बल्कि स्वीकार्य व्यवस्था बन चुकी है? दिल्ली की सड़क पर हुए गड्ढे में रात भर तड़पता रहा कमल, पर सिस्टम सोता रहा। सुबह मिली लाश के बाद हरकत में आई मशीनरी शायद यह नहीं समझ पाई कि एक बिलखती मां की चीखें सिर्फ शोक नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ आरोप हैं जिससे अब पूछा जाना जरूरी है, क्या तुम्हें भी कभी दर्द होता है?

 

सूचना थी, संसाधन थे, मोबाइल की लोकेशन भी मिल गई थी। फिर भी एक युवक को तड़प-तड़पकर मरने दिया गया। जनकपुरी हादसे में 20 फीट गहरे गड्ढे में फंसे कमल को बचाने से सिस्टम ने हाथ खींच लिए। घटनास्थल से महज 800 मीटर दूर थाना था और 200 मीटर के दायरे की मोबाइल लोकेशन थी।

 

इसके बावजूद स्मार्ट कही जाने वाली दिल्ली पुलिस रात भर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी। परिजन दो थानों के बीच अपने लाड़ले को खोजने के लिए भटकते रहे लेकिन पुलिस ने सर्च ऑपरेशन नहीं शुरू किया। नतीजतन एक युवा पूरी रात अंधेरे में तड़पता रहा और सुबह उसकी लाश निकली।

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कमल ने भाई को किया था आखिरी कॉल
एक बार फिर वही सवाल है, क्या राजधानी में जान बचाने से पहले नियम पूरे होने का इंतजार किया जाता है? परिजनों का कहना है कि कमल ने बृहस्पतिवार रात 11:53 बजे अपने भाई करण को जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास से फोन कर बताया था कि वह कुछ ही मिनटों में घर पहुंच जाएगा। 

 

इसके थोड़ी देर बाद से उसका फोन उठना बंद हो गया। घंटी बजती रही, लेकिन फोन नहीं उठा। आशंकित परिजन रात करीब 1:35 बजे अपने सबसे नजदीकी थाना विकासपुरी पहुंचे लेकिन वहां से उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
1:35 बजे पुलिस को बताया, फिर भी करते रहे टालमटोल
परिजनों ने पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया कि कमल का फोन बंद नहीं है, सिर्फ काल रिसीव नहीं हो रही है। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने न तो तत्काल तलाश शुरू की और न आपराधिक आशंका को गंभीरता से लिया।
विकासपुरी थाने में यह कहकर टाल दिया गया कि किसी दुर्घटना या एमएलसी की जानकारी नहीं है। न ही बाइक नंबर से कोई रिपोर्ट मिली है। परिजन फिर जनकपुरी थाने पहुंचे लेकिन वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस दौरान परिजन एक दो थाने और गए और कमल की तलाश की गुहार लगाई।

आखिरकार सुबह 2:50 बजे जनकपुरी थाने में कमल के गायब होने की तहरीर पुलिस ने ली और मोबाइल सर्विलांस पर लगाया। लोकेशन पोसांगीपुर पार्क, जनकपुरी के पास आई। बताया जा रहा है कि यहां लोकेशन का दायरा 200 मीटर के करीब का था।
पश्चिमी जिले के डीसीपी दरादे शरद भास्कर के अनुसार, पुलिस ने परिवार के साथ आसपास की कॉलोनियों में तलाश की। हैरानी है कि थाने से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर सड़क पर खुले पड़े 20-20 फीट गहरे गड्ढ़ों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। उसी गड्ढे में कमल गंभीर हालत में पड़ा तड़पता रहा।
गड्ढे के पास तैनात था गार्ड…।
जिस गड्ढे में कमल गिरा, उसके पास एक सुरक्षा गार्ड तैनात था। गार्ड कहां है इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। यह सवाल अब गंभीर रूप से उठ रहा है कि बिना किसी सुरक्षा घेराबंदी के सड़क पर इतने बड़े गड्ढे कैसे छोड़ दिए गए और पुलिस की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी। घटना के बाद से सुरक्षा गार्ड का भी पता नहीं चल पाया है। मौके पर मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस उसे अपने साथ ले गई है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

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सुबह 8:03 बजे मिली कॉल, शाम 4:48 बजे दी गई आधिकारिक जानकारी
पुलिस की सूचना साझा करने की शैली भी सवालों के घेरे में है। शुक्रवार सुबह 8:03 बजे एक महिला ने पुलिस को फोन कर युवक के गड्ढे में पड़े होने की जानकारी दी। इसके बावजूद पश्चिमी जिला पुलिस ने घटना की आधिकारिक जानकारी शाम 4:48 बजे दी। कमल के गायब होने की सूचना पुलिस को रात 1:35 बजे ही मिल चुकी थी।

जल बोर्ड के 20 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत
नोएडा में इंजीनियर की मौत का मामला शांत भी नहीं हुआ कि अब राजधानी दिल्ली में जल बोर्ड की ओर से खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक युवक की मौत हो गई। जनकपुरी वी-ब्लॉक में 20 फीट गहरे गड्ढे में बृहस्पतिवार रात गिरे युवक ने मदद न मिलने पर तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
जनकपुरी थाने में ठेकेदार और जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने जांच समिति बनाते हुए जल बोर्ड के कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया है।
मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पोखरा गांव निवासी कमल ध्यानी (25) परिवार के साथ पालम के कैलाशपुरी में रहते थे। वह रोहिणी में एचडीएफसी के कॉल सेंटर में कार्यरत थे। भाई करण ने बताया, रात 11:53 बजे कमल ने फोन पर बताया कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर के पास पहुंच गया है, 10-15 मिनट में घर पहुंच जाएगा।
इसके बाद उसका कोई पता नहीं चल पाया। अनहोनी की आशंका में परिवार रातभर उसे तलाशता रहा, लेकिन सुबह उसकी मौत की खबर मिली। पुलिस उपायुक्त दरादे शरद भास्कर ने बताया कि शुक्रवार सुबह 8:03 बजे पुलिस ने दमकलकर्मियों की मदद से कमल को गड्ढे से निकाला। अस्पताल पहुंचाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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