हरिपुर-कोटी-क्वानू-मीनस राजमार्ग पर मंगलवार को हुए सड़क हादसे में सरकारी सिस्टम पूरी तरह से फेल नजर आया। स्थिति यह रही कि एसडीआरफ और एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लग गया। इस बीच जौनसार बावर के स्थानीय ग्रामीण और राहगीर संकटमोचक बने। ग्रामीणों और राहगीरों ने राहत बचाव कार्य शुरू कर घायलों को खाई से बाहर निकाला, उन्हें निजी और यात्री वाहनों से उपचार के लिए अस्पतालों भी भिजवाया।
डाकपत्थर और त्यूणी दोनों स्थानों से घटनास्थल की दूरी 60 किलोमीटर है। चकराता से घटनास्थल 36 किलोमीटर दूर है, वहीं देहरादून से घटनास्थल की दूरी करीब 99 किलोमीटर है। ऐसे में एसडीआरएफ और एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लग गया। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने घायलों को खाई से बाहर निकाला और क्वानू के चिकित्सकों की टीम ने उनका प्राथमिक उपचार किया। इस बीच मार्ग से गुजर लोगों ने घायलोंं को अपने निजी वाहनों में बैठाया। यूटिलिटी और मैक्स चालकों ने भी संकट के समय में मदद के लिए हाथ बढ़ाए। निजी वाहनों, यूटिलिटी और मैक्स वाहनों से ही अधिकतर यात्री अस्पताल पहुंचे।
बस हादसा त्यूणी और कालसी के बीच हुआ था, जो चकराता तहसील क्षेत्र में आता है। सूचना पर डाकपत्थर, त्यूणी और चकराता एसडीआरफ टीम घटनास्थल के लिए निकली थी। स्वास्थ्य विभाग ने साहिया, चकराता, विकासनगर से एक-एक और देहरादून से दो एबुलेंस घायलों को अस्पताल तक लाने के लिए भिजवाई थी। सीएचसी चकराता और पीएचसी कालसी से भी एक-एक टीम घटनास्थल की ओर रवाना हुई थी। वहीं क्वाून अस्पताल की चिकित्सकीय टीम पहले से मौके पर पहुंचकर घायलों के उपचार में जुट गई थी।

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