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Covid-19: नए वैरिएंट का खतरा- भारत में इन जगहों पर रिपोर्ट किए गए नए वैरिएंट के मामले? जानिए तीन महत्वपूर्ण बातें

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Covid-19: नए वैरिएंट का खतरा- भारत में इन जगहों पर रिपोर्ट किए गए नए वैरिएंट के मामले? जानिए तीन महत्वपूर्ण बातें

कोरोना के नए वैरिएंट के मामले कई देशों में तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने के भीतर भारत में भी संक्रमितों की संख्या में उछाल देखा गया है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG या इंसाकॉग) द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक नए वैरिएंट FLiRT (फिलर्ट) के अब तक 325 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। सिंगापुर में कोरोना के जोखिमों को बढ़ाने वाले फिलर्ट वैरिएंट KP.2 के मामले भारत में भी बढ़ रहे हैं, जिसको लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा साझा की गई नए वैरिएंट की प्रारंभिक जानकारियों के मुताबिक फिलर्ट भी ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही एक रूप है। इसकी प्रकृति भी पहले के वैरिएंट्स से मिलती-जुलती देखी जा रही है। फिलर्ट में कुछ नए म्यूटेशन जरूर हैं जो इसे आसानी से शरीर में प्रवेश करने और संक्रमण बढ़ाने वाला बनाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

किन राज्यों में रिपोर्ट किए गए कोरोना के मामले?
इंसाकॉग द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक कोरोना के इस नए वैरिएंट के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट में रिपोर्ट किए गए हैं। महाराष्ट्र में इस नए वैरिएंट से संक्रमित 148 मामलों की पहचान की गई है। इसे बाद पश्चिम बंगाल में 36 लोगों को संक्रमित पाया गया है। गुजरात में 23, राजस्थान में 21, ओडिशा में 17, उत्तराखंड में 16, गोवा में 12, उत्तर प्रदेश में 8, कर्नाटक में 4, हरियाणा में 3, मध्य प्रदेश और दिल्ली में एक-एक लोगों में नए वैरिएंट से संक्रमितों की पहचान की गई है।

आइए इस नए वैरिएंट के बारे में महत्वपूर्ण बातें जानते हैं।
1. अपशिष्ट जल में मिला ये नया वैरिएंट

सीडीसी द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक पहली बार अपशिष्ट जल की जांच के दौरान कोरोना के इस नए वैरिएंट की पहचान की गई थी। अब तक सिंगापुर, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और भारत सहित कई देशों में इसके मामले देखे जा चुके हैं।

सिंगापुर इस नए वैरिएंट से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में सिंगापुर में दो-तिहाई से अधिक मामले इसी वैरिएंट से संबंधित हैं। 3 मई तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने KP.2 को ‘वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग’ के रूप में वर्गीकृत किया है।

2. फिलर्ट वैरिएंट के बारे में क्या-क्या पता चला?
येल मेडिसिन की रिपोर्ट के मुताबिक फिलर्ट वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में कुछ म्यूटेशन हैं जो इसकी संक्रामकता को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उत्परिवर्तन वायरस को इंसानो के शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने के योग्य बनाते है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से ये नया वैरिएंट बढ़ रहा है, ये जल्द ही ओमिक्रॉन के JN.1 को पीछे छोड़ सकता है। सर्दियों के दौरान JN.1 के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे थे।

नए वैरिएंट से कैसे करें बचाव?
येल मेडिसिन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ स्कॉट रॉबर्ट्स कहते हैं, कोरोना के इस नए वैरिएंट के जोखिमों से बचे रहने के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना जरूरी है। मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की स्वच्छता जैसे उपाय करते रहना आवश्यक है। डॉ. रॉबर्ट्स कहते हैं, टीकाकरण अभी भी कोरोना से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। कोविड के नवीनतम टीके, नए वैरिएंट्स के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

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