साजिश?: अमेरिका-इस्राइल ने अहमदीनेजाद को ईरान की सत्ता सौंपने पर किया था विचार, बड़ा खुलासा

मेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान में सत्ता परिवर्तन की कथित योजना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को युद्ध के बाद नई सरकार का चेहरा बनाने पर विचार किया गया था। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब फरवरी में ईरान और इस्राइल के बीच हुए संघर्ष को लेकर कई नई जानकारियां सामने आ रही हैं।

 

अमेरिका-इस्राइल को क्या उम्मीद थी?

अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल के अधिकारियों ने युद्ध की रणनीति तैयार करते समय अहमदीनेजाद से संपर्क किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के अधिकारियों को उम्मीद थी कि अगर ईरान की मौजूदा सत्ता कमजोर होती है तो अहमदीनेजाद नई राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

अहमदीनेजाद के आवास पर हमले को लेकर क्या दावा?

रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के पहले ही दिन इस्राइल ने तेहरान में स्थित अहमदीनेजाद के आवास पर हमला किया था। बताया गया कि यह हमला उन्हें कथित नजरबंदी से बाहर निकालने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि इस हमले में अहमदीनेजाद घायल हो गए। इसके बाद वह कथित तौर पर शासन परिवर्तन की योजना से निराश हो गए और उन्होंने इस प्रक्रिया से दूरी बना ली।

अहमदीनेजाद से अमेरिका-इस्राइल को क्या उम्मीदें थी

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि अहमदीनेजाद को ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा था जो ईरान की राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य स्थिति को संभाल सकते थे। अखबार से बातचीत में अहमदीनेजाद के एक करीबी सहयोगी ने भी इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका उन्हें भविष्य के संभावित नेता के रूप में देख रहा था।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अहमदीनेजाद को अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ऐसे नेता के तौर पर देखा जा रहा था जो पश्चिमी देशों के साथ काम करने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि यह दावा काफी विवादास्पद माना जा रहा है क्योंकि अहमदीनेजाद अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिका और इस्राइल के सबसे बड़े आलोचकों में शामिल रहे हैं।

कौन है महमूद अहमदीनेजाद?

महमूद अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बार इस्राइल विरोधी बयान दिए थे और इस्राइल को नक्शे से मिटाने जैसी टिप्पणी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों में रहे थे। लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने ईरानी नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी थी। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।

पिछले कुछ वर्षों में ईरानी सरकार ने उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिये पर डाल दिया था। उन्हें बाद के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से भी रोक दिया गया था और रिपोर्टों के मुताबिक वह लंबे समय से सीमित राजनीतिक गतिविधियों के बीच रह रहे थे।

रिपोर्ट में और क्या किया गया दावा?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और इस्राइल की योजना केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनका लक्ष्य ईरान में नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना भी था। यही वजह थी कि वैकल्पिक नेतृत्व के तौर पर अहमदीनेजाद जैसे नेताओं पर विचार किया गया।

रिपोर्ट में वेनेजुएला का भी उदाहरण दिया गया है। अहमदीनेजाद के करीबी सहयोगी ने दावा किया कि अमेरिका उन्हें वेनेजुएला की नेता डेल्सी रोड्रिगेज की तरह देख रहा था, जिन्होंने सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका के साथ करीबी संबंध बनाए।

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