हरिद्वार: संत सम्मेलन में पहुंचे CM धामी, कहा-कुंभ में संतों की भूमिका अहम, दिव्य और भव्य होगा आयोजन

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ व विशाल संत सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने संत-महात्माओं का अभिनंदन किया और आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा, संस्कार एवं समाज जागरण के कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने संत समाज को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना का संवाहक बताते हुए कहा कि इतिहास में संतों एवं मनीषियों ने समाज को मार्गदर्शन देने के साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में संत समाज का योगदान अतुलनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए युग का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे कार्य भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के सार्थक प्रयास और योजनाओं के मूर्त रूप लेने वाले देशभर के कई परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने सम्मेलन के मंच से संतों को 2027 के कुंभ के दिव्य और भव्य आयोजन को लेकर आश्वस्त किया। उन्होंने न केवल उत्तराखंड के संतों को इसके लिए आश्वस्त किया कि धर्म की रक्षा हर हाल में होगी। कहा कि देवभूमि मेंं कोई भी विकास कार्य यहां के देवतुल्य संतों और जनता को विश्वास में लेकर किया जाएगा।

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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रसिद्ध स्थलों को काशी, अयोध्या और उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने उन लोगों को संदेश दिया कि संकरी गलियां और तंग रास्ते काशी की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे। उनके इस संबोधन में देवभूमि में कॉरिडोर की परिकल्पना को लेकर जल्द कार्य करने का भी संकेत दिखा।


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