हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है, जिससे नवरात्रि पूजा का विधिवत आरंभ माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो शक्ति और स्थिरता का प्रतीक हैं।
मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह शुद्ध करें।
- शुभ समय में विधिपूर्वक कलश स्थापना से पूजा की शुरुआत करें।
- मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें।
- कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालकर ऊपर नारियल रखें।
- मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें कुमकुम, अक्षत, सफेद पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।
- श्रद्धा भाव से मंत्र जाप करें और चाहें तो दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी करें।
घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त क्या है?
अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना के लिए दोपहर 12.05 बजे से 12.53 बजे के बीच का समय रहेगा।
नवरात्रि व्रत नियम
- नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना अवश्य करनी चाहिए। मान्यता है कि, इससे घर में देवी दुर्गा का वास बना रहता है।
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और मन, वचन व कर्म की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
- नवरात्रि के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए।
- प्रतिदिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करें और दुर्गा चालीसा का पाठ पढ़ें। इससे विशेष पुण्य फल मिलता है।
- नवरात्रि के दौरान अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
- पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। इसके पास जूते-चप्पल या गंदगी जैसा कोई भी सामान न रखें।
- नवरात्रि के समय घर में मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
- अगर अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो भूलकर भी घर को खाली न छोड़े।







