भारत में दीपोत्सव का उल्लास- आज देशभर में दिवाली की धूम, जानिए लक्ष्मी पूजन विधि और मुहूर्त

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20 अक्तूबर को पूरे देश में दिवाली मनाई जा रही है। यह कार्तिक माह की अमावस्या तिथि है। इस दिन घरों से लेकर मंदिरों में लक्ष्मी पूजन का भव्य आयोजन किया जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। साथ ही व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि होती हैं। आइए इस दिन के शुभ योग और महत्व को जानते हैं…

 

दिवाली पर बन रहा है शुभ हंस महापुरुष राजयोग
इस वर्ष दिवाली के दिन एक विशेष और शुभ योग बन रहा है जिसे हंस महापुरुष राजयोग कहा जाता है। यह योग तब बनता है जब गुरु ग्रह (बृहस्पति) अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होता है। गुरु का यह संयोग बेहद शुभ माना जाता है और यह योग व्यक्ति के जीवन में वैभव, बुद्धि, सम्मान और समृद्धि लाने वाला होता है। दिवाली जैसे पावन पर्व पर इस राजयोग का बनना इस दिन की धार्मिक और ज्योतिषीय महत्ता को और अधिक बढ़ा देता है।

 

लक्ष्मी पूजन का लाभ

  • लक्ष्मी पूजन दीपावली के सबसे प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है, जो केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती और आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार होता है।
  • इस दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है, जो बुद्धि, विवेक और शुभता के देवता हैं। लक्ष्मी और गणेश की संयुक्त आराधना से न केवल धन प्राप्त होता है, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता, शांति और संतुलन भी जीवन में आता है, जिससे घर में सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है।
  • व्यापारी वर्ग के लिए दिवाली विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। इस दिन वे अपने नए खाता-बही (लेजर) की पूजा करते हैं और व्यापार में उन्नति की प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा नए आर्थिक वर्ष की शुरुआत के रूप में देखी जाती है।
  • इसके अलावा, अमावस्या की अंधेरी रात में दीप जलाकर की गई लक्ष्मी पूजा जीवन से नकारात्मकता और अज्ञान के अंधकार को दूर करती है। यह पवित्र अनुष्ठान न केवल भौतिक सुख देता है, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता और मानसिक सुकून भी प्रदान करता है। इस प्रकार लक्ष्मी पूजन जीवन के हर पहलू में शुभता और समृद्धि लाने का माध्यम है।
20 अक्तूबर को क्यों मनाई जाएगी दिवाली
इस वर्ष दीपावली की तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है। दीपावली सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का शुभ अवसर है. सही समय पर पूजा करने से समृद्धि, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है। दीपावली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रदोष व्यापिनी अमावस्या को मनाया जाता है. श्री शुभ सम्वत् 2082 शाके 1947 कार्तिक कृष्ण अमावस्या (प्रदोष-कालीन) 20 अक्तूबर 2025 सोमवार को है। इस दिन चतुर्दशी तिथि सूर्योदय से लेकर दोपहर 03 बजकर 44 मिनट तक रहेगी, तत्पश्चात् अमावस्या तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। दीपावली के पूजन हेतु धर्मशास्त्रोक्त प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल मुख्य हैं
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्व
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व होता है। लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ इस दिन भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने का विधान होता है। हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का खास महत्व होता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त। यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यानी प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना शुभ लाभों में वृद्धि और सर्वोत्तम माना जाता है। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न स्थिर लग्न लग्न माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली की रात को अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करने पर माता लक्ष्मी घर में अंश रूप में वास करने लगती हैं।
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व इसलिए माना गया है क्योंकि यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली और शुभफलदायी होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्यास्त के बाद का लगभग दो घंटे का समय प्रदोष काल कहलाता है, जो दिन और रात के मिलन का संधिकाल होता है। इस समय ब्रह्मांड में सात्विक और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह अपने उच्चतम स्तर पर होता है, जिससे की गई पूजा अत्यधिक प्रभावशाली और फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से दीपावली के दिन यह काल और भी शुभ हो जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी समय मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और उन घरों में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, दीपों की रौशनी, भक्ति और श्रद्धा से युक्त वातावरण होता है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन करता है, उसके घर में मां लक्ष्मी की कृपा से स्थायी रूप से धन, सुख और समृद्धि का वास होता है। अतः यह काल केवल पूजा का नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने और जीवन में सौभाग्य को आमंत्रित करने का सर्वोत्तम अवसर माना गया है।

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