इसमें 447 रंगरूट बीएसएफ में शामिल होने के लिए पास आउट हुए। कार्यक्रम में आईजी एसटीसी कश्मीर (बीएसएफ) सोलोमन यश कुमार मिंज मुख्य अतिथि थे।
उन्होंने रिक्रूटों को साहस और उत्साह के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। आईजी ने रंगरूटों को उनके जीवन और सेवा में उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्य अतिथि ने विभिन्न इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण गतिविधियों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले रंगरूटों को पदक से सम्मानित किया। बैच 128, 129 और 130 की परेड की कमान रंगरूट कांस्टेबल सुभदीप पांजा ने संभाली।
हर बैच के पांच ट्रेनी को बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए ट्रॉफी मिली।
बैच के पांच प्रशिक्षुओं को विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ चुना गया और उन्हें ट्रॉफी प्रदान की गईं।
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स व अन्य सिक्योरिटी फोर्सेज के सीनियर अधिकारियों, ट्रेनी के माता-पिता और परिवार वालों ने इस यादगार परेड को देखा।
जब रंगरूट से जवान बने तो अपने शूरवीर बच्चों को देख माता-पिता भावुक हो उठे।
44 सप्ताह का किया कठोर प्रशिक्षण
एक अधिकारी ने कहा कि कांस्टेबल/जनरल ड्यूटी के बैच 128, 129 व 130 के 447 के रंगरूटों को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विकल्प के तौर पर रखा था।
अब 44 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण के बाद इन्होंने हथियारों को संभालने, फायरिंग कौशल, कानून, ड्रिल और सीमा प्रबंधन में दक्षता हासिल की है। एसटीसी बीएसएफ के प्रशिक्षकों की कड़ी मेहनत से उनकी शारीरिक दक्षता कई गुना बढ़ गई।
मुख्यातिथि का स्वागत एसटीसी बीएसएफ कश्मीर के कमांडेंट योगेंद्र अग्रवाल ने किया।
देश की रक्षा के लिए मर मिटने के लिए तैयार जवान
पासिंग आउट परेड के बाद बीएसएफ के जवान मृत्युंजय ने कहा कि दिल में देश सेवा की भावना शुरू से थी।
अब देश के बॉर्डर की रक्षा करूंगा। एक अन्य जवान अक्षय ने कहा 44 सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग के बाद आज काफी खुशी है।
देश के प्रति सेवा करने का सौभाग्य मिला है और देश के लिए मर मिटने के लिए तैयार हैं। बता दें कि लगभग सभी जवानों में एक जैसा जज्बा और उत्साह था।