कांग्रेस पार्टी की तैयारी इस बार कुछ अलग अंदाज में है। बिहार विधानसभा चुनाव की सबसे पहले जमीनी तैयारी भी कांग्रेस ने दिखाई थी और अब कागजी तैयारी भी उसने सामने रख दी है। कांग्रेस ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ 43 पन्नों का आरोप पत्र पेश किया है। इसमें घोटालों से लेकर अपराध तक का पूरा रिकॉर्ड दिया गया है। ‘अमर उजाला’ इन दावों की पुष्टि नहीं करता है। पढ़िए इन दावों में क्या-क्या रिकॉर्ड बताया गया है।
नीचे लिखी बातें कांग्रेस की ओर से गुरुवार को जारी ’20 साल-विनाश काल’ से शब्दश: ली गई हैं…
आरोप 1 : सृजन घोटाला
कांग्रेस के अनुसार, जदयू-भाजपा सरकार में लगभग ₹1000 करोड़ का सृजन घोटाला हुआ। इस घोटाले की मुख्य आरोपी बिहार भाजपा के एक बड़े नेता की रिश्तेदार थी।
मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड बिहार का एक बहुत बड़ा यौन शोषण और भ्रष्टाचार से जुड़ा कांड था। यहां 30 से अधिक नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार और शोषण हुआ।
आरोप 3 : भक्त की हत्या
अधर्मी भाजपा-जेडीयू की सरकार ने मुंगेर में मां दुर्गा के भक्तों को गोलियों से भून डाला। एक 18 वर्ष के मासूम अनुराग ने तो गोली लगने से वहीं दम तोड़ दिया।
20 वर्षों से भाजपा-जेडीयू की सरकार के शासन में बिहार की स्थिति बदहाल। CARE Ratings में बिहार को न्यूनतम स्कोर प्राप्त हुआ है। इस रैंकिंग में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है।आरोप 5 : चरम पर गरीबी
94.42 लाख से अधिक परिवार 200 रुपये प्रतिदिन या उससे भी कम आय पर गुजारा कर रहे हैं। इन परिवारों की सभी स्रोतों से कुल मासिक आय या तो 6,000 रुपये या उससे कम है। राज्य में अन्य 81.91 लाख परिवारों (29.61 प्रतिशत) की मासिक आय 6,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच है।
31 मार्च 2024 तक बिहार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा 49,649 उपयोग प्रमाणपत्र (UCS) उपलब्ध नहीं। इन UCs की कुल राशि ₹70,877.61 करोड़ है।
सरकारी अस्पतालों में 69 प्रतिशत तक डॉक्टर, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। आयुष हॉस्पिटल में तो कमी की स्थिति 82 प्रतिशत तक है। स्वास्थ्य सेवाओं के 13,340 पदों
की भर्तियां लंबित रहीं। 2016-17 से 2022 तक बजट में आवंटित ₹69,790.83 करोड़ में से केवल 69 प्रतिशत ही खर्च किया गया।
2017 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ। 2019 और 2021 में पुलिस भर्ती परीक्षा में सेंधमारी हुई। 2021-22 में उत्पाद विभाग परीक्षा, 2022 में BPSC 67वीं PT पेपर लीक हुआ। फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक। 2023 में अमीन भर्ती परीक्षा भी लीक। 2023 में NEET पेपर लीक। 2024 में BPSC शिक्षक भर्ती घोटाला। 2024 में स्वास्थ्य विभाग में CHO भर्ती का घोटाला हुआ।आरोप 9 : शिक्षा बदहाल
हायर सेकेंडरी में बिहार का ग्रॉस एनरोलमेंट रैशो 30%, जबकि राष्ट्रीय औसत 56.2% है। सेकेंडरी में बिहार का ग्रॉस एनरोलमेंट रैशो 45.6%, जबकि राष्ट्रीय औसत 77.4% है। अपर प्राइमरी (कक्षा 6-8): बिहार में औसत 68.4% वहीं देशभर का औसत 89.9% है। 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है। कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में। राज्य के 2,637 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है, जबकि इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं। राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं।
2024 में भारत से अमेरिका को 600 टन मखाना निर्यात हुआ। इसमें 85-90% हिस्सा बिहार से उत्पादित था, लेकिन निर्यात पंजाब और असम के जरिए हुआ। अमेरिका ने मखाना सहित भारत के आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे बिहार के मखाना उत्पादकों और निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। मिथिला सिल्क, मधुबनी प्रिंट, लीची, मसाले- सबके निर्यात पर संकट के बादल छा रहे हैं।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 2,98,57,554 रजिस्टर्ड मजदूर हैं। यह वास्तविक संख्या 3 करोड़ 45 लाख है। खुद श्रमिकों ने यह बताया है कि 94 प्रतिशत लोगों की आमदनी 10,000 रुपये प्रतिमाह से कम है और इसमें से अधिसंख्य पलायन के लिए विवश किए गए हैं। 2. बीते वर्षों इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साईंस की रिपोर्ट में यह चौंकानेवाला खुलासा हुआ कि बिहार की लगभग आधी आबादी पलायन के लिए मजबूर है।आरोप 12 : फर्जी वादे की भरमार
“मुंबई जैसा मोतिहारी होगा, पुणे जैसा पटना और गुरुग्राम जैसा गयाजी” बोलने वाले पीएम मोदी ने यह नहीं बताया कि काशी को क्योटो बनाने के वादे का क्या हुआ?”
बिहार सरकार की कमजोर दलीलों और केंद्र सरकार की अनिच्छा के चलते पटना उच्चन्यायालय ने 20/06/2024 को बिहार सरकार द्वारा कास्ट सर्वे के आधार पर दिया हुआ आरक्षण खत्म कर दिया। इससे पहले, केंद्र की यूपीए सरकार ने 19 मई, 2011 को जातिगत जनगणना करवाने का निर्णय लिया और इसकी शुरुआत की, जिसकी रिपोर्ट 03 जुलाई, 2015 को पेश की गई। परंतु जातिगत जनगणना के आंकड़े एक षडयंत्र के तहत जारी नहीं किए गए।
जहां 2005 में कुल अपराध 1,07,664 प्रतिवर्ष होते थे वो बढ़कर 2022 में 3,47,835 प्रतिवर्ष हो गए। बिहार में हर रोज 953 अपराध हो रहे हैं – जिसमें 8 हत्याएं, 33 अपहरण, 136 जघन्य अपराध, 55 महिला अपराध, 28 महिलाओं के अपहरण, दो से ज्यादा बलात्कार, 17 बच्चों के अपहरण शामिल हैं। भाजपा-नीतीश सरकार आने के बाद महिलाओं के अपहरण 1097 बढ़ गए हैं। हत्या के प्रयास 262 प्रतिशत बढ़ गए हैं, और जघन्य अपराध 206 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। विडंबना यह है कि 4000 से अधिक नाबालिग बच्चियाँ शादी के लिए अगवा कर ली जाती हैं। बिहार में 6 महीने में 9 बड़े कारोबारियों की हत्या हो गई।आरोप 15 : नकली दवा सरगना
बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा Alto Health Care Private Limited नामक फार्मास्युटिकल कंपनी से संबंधित हैं। राजस्थान के राजसमंद जिले में हुई ड्रग इंस्पेक्शन में पाया गया कि उनकी कंपनी द्वारा सप्लाई की गई Ciproline-500 टैबलेट्स गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरीं और मिलावटी पाई गईं।
पिछले तीन वर्षों में राज्य में कम से कम 27 पुल गिर चुके हैं, जिनमें से कई करोड़ों की लागत से बने थे और कई अब भी निर्माणाधीन थे। 2024 में केवल 17 दिनों के अंदर 12 पुल गिरे। ये घटनाएं राज्य की निर्माण एजेंसियों की विफलता और प्रशासन की आंख मूंद लेने वाली नीति का प्रतीक बन गई हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग और धार्मिक न्यास बोर्ड जैसे संवैधानिक और अर्धस्वायत्त संस्थानों में नेताओं के दामादों और अधिकारियों की पत्नियों को महत्वपूर्ण पद सौंपे हैं, जिससे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी भाजपा-जेडीयू की सत्ता अब भाई-भतीजावाद में डूबी है।
बिहार राज्य में गंगा और उसकी सहायक नदियों के लिए बनाए गए STPS (Sewage Treatment Plants) की कुल संख्या 13 है। जिनमें से पूर्णतः फंक्शनल (चल रहे) STPS 7 हैं तथा गैर-मानक (Non-compliant) STPS भी 7 हैं, यानी सभी 7 फंक्शनल STPS FC मानकों पर फेल हैं। फीकल कोलीफॉर्म (FC) बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होने का अर्थ है कि उसमें मानव और पशुओं के मल-मूत्र की मात्रा इतनी ज्यादा है कि NGT ने कहा कि पीना तो दूर, यह नहाने लायक भी नहीं है। नामामि गंगे योजना के अंतर्गत 2014-2024 के बीच बिहार को ₹3,914.53 करोड़ मिले, लेकिन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPS) आधे से ज़्यादा काम नहीं कर रहे हैं, और जो काम कर रहे हैं, वह एक भी मानक स्तर पर खरे नहीं उतरे।









