शीर्ष पीठ उदासीन ऋषि आश्रम–रानोपाली में रविवार को गुरुओं की समाधि पूजन के साथ आध्यात्मिकता और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की भीड़ से आस्था का इंद्रधनुषी माहौल बना रहा।
पीठाधिपति महंत डॉ. भरतदास ने संप्रदायाचार्य श्रीचंद के विग्रह सहित सभी गुरुओं की समाधियों का पूजन वैदिक विधि-विधान से किया। उन्होंने कहा गुरुओं को याद करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि साधना और सिद्धि के युग का स्मरण है। यही मार्ग हमें धर्म, आस्था और समाज सेवा की प्रेरणा देता है।”
वृहद भंडारा और संतों की गरिमामयी उपस्थिति
पूजन के उपरांत गुरुओं की स्मृति में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। हजारों संत-श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ उठाया।
इस अवसर पर अनेक पीठों और मठों के आचार्य, महंत एवं संतों की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
प्रमुख उपस्थित संत-महात्मा:
दशरथमहल पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य
जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य
हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास व संकटमोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास
रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास, रंगमहल के महंत रामशरणदास
रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजयशरण, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेशदास
दिगंबर अखाड़ा के महंत उत्तराधिकारी रामलखनदास
निर्वाणी अनी के श्रीमहंत मुरलीवस, पूर्व प्रधानमंत्री माधवदास
महामंडलेश्वर महंत गिरीशदास, स्वामी माधवानंद
समाजसेवी नंदकुमार मिश्र, संस्कृत महाविद्यालय प्राचार्य रामभद्रदास, अखंड सिंह, अभिषेक शुक्ल आदि गणमान्य लोग शामिल रहे।
गुरु पर्व के विविध कार्यक्रम
8 सितंबर को श्रीमद्भागवत प्रवचन और पाठ के साथ शुभारंभ
सोमवार को रामचरितमानस का अखंड पारायण
मंगलवार को ध्वज पूजन
18 सितंबर को समापन समारोह









