अयोध्या: 4 साल में 80 फीसदी बन गया राममंदिर, मार्च 2025 तक पूरा हो जाएगा शिखर

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रामलला के मंदिर के उद्घाटन के एक साल अंग्रेजी तिथि के अनुसार 22 जनवरी को पूरे हो जाएंगे। यह तिथि भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुकी है। इसी दिन भव्य राम मंदिर में ऐतिहासिक समारोह के बीच रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। बुधवार को 22 जनवरी की तिथि है ऐसे में राम मंदिर निर्माण की यात्रा को जानना जरूरी हो उठता है। राम मंदिर निर्माण की सुखद यात्रा नौ नवंबर 2019 को आए फैसले के बाद शुरू हुई थी। पिछले चार सालों में राम मंदिर का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। आठ-दस महीने के भीतर राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।

राम मंदिर के भूतल में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है जबकि प्रथम व दूसरे तल का निर्माण कार्य चल रहा है। राम मंदिर का शिखर भी आकार ले रहा है। मंदिर निर्माण पर अब तक 1200 करोड़ खर्च हो चुके हैं। नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर के हक में फैसला आने के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। फरवरी 2020 में केंद्र सरकार के आदेश पर राम मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ। सबसे पहले रामलला को टेंट से अस्थायी मंदिर में 25 मार्च 2020 की रात सीएम योगी ने विराजित किया। पांच फरवरी 2020 को वह घड़ी भी आ गई जो सदियों से प्रतीक्षित थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण की आधारशिला रखी।

 

इन चार सालों में राममंदिर निर्माण में कई बाधाएं आईं। पहले टेस्ट पाइलिंग की गई, इसी पर मंदिर को आकार देने का निर्णय हुआ, लेकिन जब पाइलिंग पर भूकंप की तरह झटके दिए गए तो इसमें दरार आ गई। फिर निर्णय बदलते हुए 50 फीट गहराई तक खोदाई की गई। इस पर पत्थरों की चट्टान बिछाई गई। फिर फाउंडेशन का निर्माण कर मंदिर को आकार देने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बीच कोरोना ने दस्तक दे दी। कोरोना काल में छह माह तक राममंदिर निर्माण का काम प्रभावित रहा।

राम मंदिर के भूतल यानी गर्भगृह को आकार देने में तीन साल लग गए। 22 जनवरी 2024 को भव्य समारोह के बीच भूतल में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई। राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि राम मंदिर का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के अनुसार ही चल रहा है। लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो गया है। इसी साल मंदिर समेत सभी प्रकल्पों का निर्माण पूरा हो जाएगा। 

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मंदिर निर्माण की तय समय सीमा

– मार्च 2025- शिखर निर्माण
– अप्रैल 2025- मंदिर समेत सप्त मंडपम
– अगस्त 2025- शेषावतार मंदिर
– अक्तूबर 2025- परकोटा

राममंदिर का विवरण
– मंदिर परंपरागत नागर शैली में निर्मित
– मंदिर की लंबाई पूर्व-पश्चिम 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट एवं ऊंचाई 161 फीट
– तीन मंजिला मंदिर, प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट, कुल 392 स्तंभ, 44 दरवाजे
– भूतल गर्भगृह- प्रभु श्रीराम के बाल रूप यानी रामलला का विग्रह, प्रथम तल- श्रीराम दरबार
– कुल पांच मंडप- नृत्यमंडप, रंग मंडम, गूढ़ मंडप, प्रार्थना मंडप, कीर्तिन मंडप
– खंभे, दीवारों में देवी-देवता व देवांगनाओं की मूर्तियां
– प्रवेश पूर्व से, 32 सीढि़यां ऊंचाई 16. 5 फीट चढ़कर सिंहद्वार से।
– दिव्यांगजन व वृद्धों के लिए रैंप व लिफ्ट की व्यवस्था
– चारों ओर आयताकार परकोटा- लंबाई 732 मीटर, चौड़ाई 4. 25 मीटर, ऊंचाई 14 फीट
– परकोटा में छह मंदिर- चारों कोनों पर चार मंदिर- भगवान सूर्य, शंकर, गणपति, देवी भगवती
– परकोटे की दक्षिणी भुजा में हनुमान एवं उत्तरी भुजा में अन्नपूर्णा माता का मंदिर
– मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप
– सप्त मंडपम में सात मंदिरों- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी एव देवी अहिल्या
– दक्षिणी-पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीले पर स्थिति शिव मंदिर का जीर्णेाद्धार एवं जटायु राज की प्रतिमा

श्रद्धालुओं को मिल रही ये सुविधा

– 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ
– दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की सुविधा
– दर्शनपथ से लेकर राममंदिर तक एलईडी टीवी
– दर्शनपथ पर छांव के इंतजाम, वाटर प्लांट
– श्रद्धालुओं के सामान व जूता चप्पल जमा करने के लिए लॉकर
– तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल
– वीआईपी दर्शन के लिए सुगम व विशिष्ट दर्शन पास की सुविधा
– रामलला की श्रृंगार आरती का लाइव प्रसारण
– रामलला की श्रृंगार, मंगला व शयन आरती के लिए पास की सुविधा

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