पश्चिम एशिया में ईरान के हमलों, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष के फिर तेज होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल बढ़ गई है।शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत कारोबार के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। मई के बाद यह पहला मौका है, जब कीमत इस स्तर पर पहुंची। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्गों और तेल प्रतिष्ठानों पर बढ़ते हमलों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में रविवार से अब तक कम से कम नौ वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान ने बुधवार को कंटेनर जहाज जीएफएस प्राइड को डुबो दिया। सिंगापुर के समुद्री प्राधिकरण ने बताया कि जहाज के चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया गया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक, इस सप्ताह हमलों में तीन नाविक घायल हुए हैं और दो लापता हैं।ऊर्जा शोध संस्था केप्लर के आंकड़ों के अनुसार बुधवार को समाप्त सप्ताह में होर्मुज से कच्चे तेल का निर्यात घटकर प्रतिदिन 94 लाख बैरल रह गया। यह युद्ध से पहले के औसत स्तर का करीब 70 प्रतिशत है।
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस सप्ताह सऊदी अरब पर कई हमले किए। शुक्रवार को सऊदी सेना ने लाल सागर के ऊपर कई मिसाइलों को रोका। इनमें एक मिसाइल तेल निर्यात टर्मिनल यानबू की ओर जा रही थी। रियाद और दक्षिणी क्षेत्रों में तीन ड्रोन भी नष्ट किए गए। इससे पहले मंगलवार को धहरान में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक प्रशासनिक भवन पर हमला हुआ था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर रूस और यूक्रेन के बीच प्रस्तावित ऊर्जा युद्धविराम प्रभावी नहीं रह सका। रूस के हमले जारी रहने के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जवाब में रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू करने की बात कही। अमेरिका में डीजल की औसत कीमत शुक्रवार को 6.33 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में 70 प्रतिशत से अधिक है। इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार तूफान इसायस के कारण खाड़ी तट पर उत्पादन बाधित होने से नौ अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल भंडार में 80 लाख बैरल से अधिक की गिरावट आई।ऊर्जा प्रतिष्ठानों और आपूर्ति मार्गों पर एक साथ बढ़ते हमले तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं। यदि होर्मुज से निर्यात और प्रभावित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति तथा ईंधन की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।






